शुक्रवार, 19 सितंबर 2014

अतृप्त पूर्वजोंद्वारा होनेवाले कष्टोंके कारण तथा उसपर उपाय

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अतृप्त पूर्वजोंद्वारा होनेवाले कष्टोंके कारण तथा उसपर उपाय
         अ. अतृप्त पूर्वजोंसे अपने रक्षणके लिए गुरुकृपा और कठोर साधनाके अतिरिक्त अन्य पर्याय न होना |
         आ. अतृप्त पूर्वज घरके सदस्योंको कष्ट क्यों देते हैं ?
         इ. पूर्वजोंकी आसक्ति भूमि तथा घरमें होना |
२. दत्तात्रेयके नामजपद्वारा पूर्वजोंके कष्टोंसे रक्षण कैसे होता है ?
         अ. पूर्वजोंको गति मिलना
         आ.  संरक्षक-कवच निर्मित होना
         इ. दत्तात्रेय देवताका अनिष्ट शक्तियां बने पूर्वजोंका नाश करना
३. पितृपक्षमें दत्तात्रेय देवताका नाम जपनेका महत्त्व
 १. तृप्त पूर्वजोंद्वारा होनेवाले कष्टोंके कारण तथा उसपर उपाय
         कलियुगमें अधिकांश लोग साधना नहीं करते, अत: वे मायामें फंसे रहते हैं । इसलिए मृत्युके उपरांत ऐसे लोगोंकी लिंगदेह अतृप्त रहती है । ऐसी अतृप्त लिंगदेह मर्त्यलोक (मृत्युलोक)में फंस जाती है ।

अ. अतृप्त पूर्वजोंसे अपने रक्षणके लिए गुरुकृपा और कठोर साधनाके अतिरिक्त अन्य पर्याय न होना |
        ‘कुछ मृत व्यक्तियोंका अपने घरके सदस्यों पत्नी, बच्चे तथा अन्यपर इतना प्रेम होता है कि उन्हें छोडकर मृत्युके पश्चात आगेका प्रवास करना उन्हें कठिन लगता है । इस कारण जिस व्यक्तिमें लिंगदेह अटकी हुई है वह भी उसके साथ जाए, ऐसी उस लिंगदेहकी इच्छा होती है । जिस व्यक्तिमें यह लिंगदेह अटकी होती है, उस व्यक्तिके मनमें यह लिंगदेह आत्महत्याका विचार डालकर आत्महत्या करनेको बाध्य करती है अथवा अपघात करवाना, रोग उत्पन्न करना, ऐसा कर उस व्यक्तिको मारकर अपने साथ ले जाती है । ऐसे हठी अतृप्त पूर्वजोंसे रक्षणके लिए गुरुकृपा और कठोर साधनाके अतिरिक्त अन्य पर्याय नहीं ।
 आ. अतृप्त पूर्वज घरके सदस्योंको कष्ट क्यों देते हैं ?
        पूर्वज स्वयं अत्यंत कष्ट कर भूमि, घर, संपत्ति आदि अर्जित करते हैं । उनकी मृत्युके पश्चात उनकी वह संपत्ति उनके परिजनोंको मिलती है । परिजन यदि उस संपत्तिका विनियोग उचित ढंगसे न कर, अपव्यय करते हों, तो पूर्वजोंको क्रोध आता है । परिणामस्वरूप वे अपने परिजनोंको कष्ट देते हैं । कालांतरमें उनकी विपुल आर्थिक हानि होती है ।

उपाय : घरके सदस्योंको पूर्वजोंद्वारा उपार्जित संपत्ति मिली हो, तो उसका सुयोग्य उपयोग करना चाहिए । उस संपत्तिका २० प्रतिशत भाग धर्मकार्यके लिए व्यय करना अथवा संतोंको दान करना चाहिए । इस दानसे पूर्वज और परिजनोंको साधनाका फल प्राप्त होकर पूर्वजोंको सद्गति मिलती है तथा परिजनोंका कष्ट दूर होता है ।
 इ. पूर्वजोंकी आसक्ति भूमि तथा घरमें होना |
        कुछ पूर्वजोंकी आसक्ति उनकी भूमि तथा घर इत्यादिमें इतनी तीव्र होती है कि वे आगेके लोकमें जानेके स्थानपर भुवलोकमें ही अटककर अपनी भूमि तथा घरमें रहते हैं । कुछ पूर्वजोंकी आसक्ति इतनी तीव्र होती है कि उनके परिजन यदि उस घरकी रचनामें कुछ परिवर्तन करें अथवा वह बेचें अथवा वहांपर नया घर बनानेके लिए उसे तोडें, तो वे क्रुद्ध होकर कष्ट देते हैं ।
 उपाय : वास्तुशुद्धि और नामजप करने तथा घरके सर्व सदस्योंके साधना करनेपर उनकी और वास्तुकी सात्त्विकता बढनेसे पूर्वज घरमें प्रवेश नहीं कर पाते और उनकेद्वारा होनेवाले कष्टसे घरके सदस्योंका रक्षण होता है । इस विषयमें नामजप काैनसा करना चाहिए यह आगे दिया है ।
 २. दत्तात्रेयके नामजपद्वारा पूर्वजोंके कष्टोंसे रक्षण कैसे होता है ?
अ. पूर्वजोंको गति मिलना
         ऊपरोल्लेखित शास्त्रानुसार कलियुगमें अधिकांश लोग साधना नहीं करते, अत: वे मायामें फंसे रहते हैं । इसलिए मृत्युके उपरांत ऐसे लोगोंकी लिंगदेह अतृप्त रहती है । मृत्युलोकमें फंसे पूर्वजोंको दत्तात्रेयके नामजपसे गति मिलती है; वे अपने कर्मानुसार आगेके लोककी ओर अग्रसर होते हैं । अतः स्वाभाविक ही उनसे संभावित कष्ट न्यून (कम) हो जाते हैं ।
 आ.  संरक्षक-कवच निर्मित होना
         दत्तात्रेयके नामजपसे निर्मित शक्तिद्वारा नामजप करनेवालेके आसपास संरक्षक-कवच निर्माण होता है ।
 इ. दत्तात्रेय देवताका अनिष्ट शक्तियां बने पूर्वजोंका नाश करना
         मनुष्यको कष्ट देनेवाले पूर्वज अर्थात पूर्वज- अनिष्ट शक्तियोंके पापका घडा भर जानेपर दत्तात्रेय देवता उन्हें दंड देते हैं । पूर्वजदोषके (पितृदोषके) कष्टोंकी तीव्रताके अनुसार दत्तात्रेय देवताका नामजप करना वर्तमान कालमें लगभग सभीको पूर्वजदोषका कष्ट है, इसलिए श्री गुरुदेव दत्त ।नामजप प्रत्येक व्यक्तिको प्रतिदिन २ घंटे, मध्यम स्वरूपके कष्टके लिए ४ घंटे और यदि तीव्र स्वरूपका कष्ट हो, तो ६ घंटे करें ।
 ३. पितृपक्षमें दत्तात्रेय देवताका नाम जपनेका महत्त्व
         पितृपक्षमें श्राद्ध विधिके साथ-साथ दत्तात्रेय देवताका नामजप करनेसे पूर्वजदोषका कष्टसे रक्षण होनेमें सहायता मिलती है । इसलिए पितृपक्षमें दत्तात्रेय देवताका नामजप न्यूनतम ६ घंटे करें ।
 दत्तात्रेय देवताके नामजपसे हुई कुछ अनुभूतियां
 दत्तात्रेय देवताका नामजप करते समय  पूर्वज संतुष्ट दिखाई देना तथा सिरपर हाथ रखकर आशीर्वाद देना |

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