शुक्रवार, 29 जून 2018

अगरबत्ती के जलने से उतपन्न हुई सुगन्ध

*शास्त्रो में जिस बांस की लकड़ी को चिता में भी जलाना वर्जित है हम उस बांस से बनी अगरबत्ती जलाते है...!!!*

*बांस जलाने से पित्र दोष लगता है*
इसलिए आजकल लोग परेशान है
*शास्त्रो में पूजन विधान में कही भी अगरबत्ती का उल्लेख नही मिलता सब जगह धूप ही लिखा है*
बांस में लेड व हेवी मेटल प्रचुर मात्रा में होते है
लेड जलने पर लेड आक्साइड बनाता है जो कि एक खतरनाक नीरो टॉक्सिक है हेवी मेटल भी जलने पर ऑक्साइड्स बनाते है
अगरबत्ती के जलने से उतपन्न हुई सुगन्ध के प्रसार के लिए फेथलेट नाम के विशिष्ट केमिकल का प्रयोग किया जाता है

यह एक फेथलिक एसिड का ईस्टर होता है
यह भी स्वांस के साथ शरीर मे प्रवेश करता है
इस प्रकार अगरबत्ती की तथाकथित सुगन्ध न्यूरोटॉक्सिक एवम हेप्टोटोक्सिक को भी स्वांस के साथ शरीर मे पहुचाती है
इसकी लेश मात्र उपस्थिति केन्सर अथवा मष्तिष्क आघात का कारण बन सकती है
हेप्टो टॉक्सिक की थोड़ी सी मात्रा लीवर को नष्ट करने के लिए पर्याप्त है।
बांस का प्रयोग शवयात्रा में टिकटी (अर्थी) बनाने में किया जाता है और इसे चिता में भी नही जलाया जाता
इस परंपरा का यही वैज्ञानिक आधार है।
🙏🏻अतः कृपया सामर्थ्य अनुसार स्वच्छ धूप का ही उपयोग करें।

पीपल की पूजा से लाभ और अनेक समस्याओं का निवारण

पीपल की पूजा से लाभ और अनेक समस्याओं का निवारण
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हिन्दू धर्म में पीपल वृक्ष को देवों का देव कहा गया है. स्वयं कृष्ण ने गीता में कहा है कि मैं वृक्षों में पीपल हूं. जिसने भी इस वृक्ष की सेवा श्रद्धा भाव से की है, उसे लाभ की अनुभूति अवश्य हुई है. आप भी आने वाले शुक्लपक्ष के शनिवार से पीपल के वृक्ष की सेवा शुरू करके अनेक प्रकार की समस्याओं से छुटकारा पाकर सुखी व समृद्ध जीवन गुजार सकते है.
उपाय- पीपल के वृक्ष की प्रत्येक शनिवार को (दूध, जल, शक्कर, शहद, काले तिल, गंगा जल और गुड़ इन सभी चीजों को जल में मिलायें) तत्पश्चात यह मीठा जल पीपल वृक्ष पर चढ़ायें और आटे का दीपक जलाकर उसमें सरसों का तेल, एक लोहे की कील व 11 साबुत उड़त के दाने डालकर धूप दीप के साथ आर्पित करें. बायें हाथ से पीपल के वृक्ष की जड़ को स्पर्श कर अपने माथे में लगायें व 11 बार परिक्रमा करें. यह उपाय करने से कुछ ही समय पश्चात आपको शनिदेव की कृपा मिलने लगेगी. इस उपाय को करने से निम्न प्रकार की समस्याओं से
मुक्ति मिलेगी

यदि कोई व्यक्ति लगातार अस्वस्थ्य रह रहा हो अथवा अल्पायु योग हो तो वह उपरोक्त उपाय को करके लाभ प्राप्त कर सकता है.

यदि आपको शत्रु अधिक परेशान कर रहें है, तो आप उपरोक्त उपाय के साथ-साथ पीपल वृक्ष के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें. ऐसा करने से शत्रुओं का नाश होगा.
यदि किसी कन्या की कुंडली में प्रबल वैधव्य यानी विधवापन होने का योग हो तो उसे उपरोक्त उपाय को कम से कम 1 वर्ष तक करने से लाभ अवश्य प्राप्त होगा.
यदि किसी के जन्मपत्री में कालसर्प योग हो तो उपरोक्त उपाय करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलेगी.
देव गुरू बृहस्पति की अशुभता समाप्त करने के लिए केले के वृक्ष के साथ पीपल के वृक्ष की भी निममित सेवा करें तो लाभ होगा.
किसी शुभ मुहूर्त में पीपल के पौधे को लगाने से तथा उसकी नियमित सेवा करने से आर्थिक स्थिति अच्छी बनी रहती है.
यदि आपको कोई विशेष कार्य सिद्ध करना है, तो के दिन उपरोक्त उपाय करने से पूर्व अपना कार्य होने का निवेदन कर पीपल वृक्ष के समक्ष मिट्टी में एक बड़ी लोहे की कील गाड़ दें और कार्य सिद्ध होने के पश्चात निकाल दें.
यदि आपको हाथ-पैरों में अथवा कमर के निचले हिस्से में दर्द बना रहता है तो आप काले कपड़े में पीपल के वृक्ष की जड़ व लकड़ी को रखकर अपने बिस्तर के सिरहाने रख लें और साथ में पीपल वृक्ष की सेवा करते रहें. कुछ समय बाद आप दर्द से मुक्त हो जायेंगे.
कैंसर जैसे असाध्य रोग में भी यदि उपरोक्त उपाय को श्रद्धा पूर्वक किया जाये तो लाभ मिलेगा.
यदि आपको निरन्तर हानि उठानी पड़ रही है तो प्रत्येक शनिवार को पीपल के एक नया पत्ते पर ऊँ लिखकर उस पत्ते को पीपल की लकड़ी के साथ धन रखने के स्थान पर रख दें. यह उपाय कम से कम 8 शनिवार तक करना होगा. कुछ समय में ही आपको लाभ होने लगेगा.और खर्चों मे कमी होगी
प्रथम सोमवार को पीपल वृक्ष के नीचे शिव प्रतिमा अथवा शिवलिंग को रख कर नियमित “ऊँ नम: शिवाय” का जाप कर जल से आभिषेक करें. आपके परिवार में सुख व समृद्धि की हमेशा रहेगी.
*************ॐ नम: शिवाय:**********

सामान्यतः इत्र का प्रयोग सुगंध के लिए विशेष अवसरों पर ही किया जाता है लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यदि आपकी कुंडली में कोई ग्रह बुरा प्रभाव दे रहा हो तो इत्र विशेष के प्रयोग से ग्रह की शांति में सहायता मिलती है। आइये जानते है कि कौन से ग्रह के बुरे प्रभाव को शांत करने के लिए किस इत्र विशेष का प्रयोग करना चाहिए :-
सूर्य: केसर तथा गुलाब का इत्र या सुगंध का उपयोग करने से सूर्य प्रसन्न होते हैं।
चंद्र: चमेली और रातरानी का इत्र या सुगंध चंद्रमा की पीड़ा को कम करते हैं।
मंगल: लाल चंदन का इत्र, तेल अथवा सुगंध मंगल को प्रसन्न करते हैं।
बुध: चंपा का इत्र तथा तेल का प्रयोग बुध की दृष्टि से उत्तम है।
गुरू: पीले फूलों की सुगंध, केसर और केवड़े का इत्र गुरू की कृपा प्राप्ति के लिए उत्तम है।
शुक्र: सफेद फूल, चंदन और कपूर की सुगंधलाभकारी होती है। चंपा,चमेली और गुलाब की तीक्ष्ण खुशबू से शुक्र नाराज हो जाते हैं। हल्की खुशबू के परफ्यूम ही काम में लेने चाहिए।
शनि: कस्तुरी, लोबान तथा सौंफ की सुगंध शनि देव को पसंद है।

अगर आये ये सपने निद्रा मे

अगर आये ये सपने


ढेर सारी धन-दौलत और एशो-आराम से भरी लाइफ, हर कोई अपने जीवन से कुछ इसी तरह की आशा रखता है। लेकिन ये भी सच है कि हर कोई इतना लकी भी नहीं होता क्योंकि ये सब नसीब भी कुछ गिने-चुने लोगों को ही होता है। बाकी तो बस धन पाने और आलीशान जिन्दगी जीने के सपने ही देखते रह जाते हैं।
लोग उन्हें कामचोर और नाकारा कहते हैं लेकिन हम इस बारे में कुछ और ही बताना चाहते हैं। आप दिनभर सोने और सपने देखने के अलावा कुछ और नहीं करते लेकिन फिर भी चाहते हैं कि आपको धन-दौलत मिल जाए। देखा जाए तो यह बहुत मुश्किल ही है परंतु गहरी नींद के समय आप जिन सपनों को देखते हैं उनमें से कुछ सपने आपको वाकई अमीर भी बना सकते हैं। इसके अलावा आम दिनचर्या में कुछ ऐसे संकेत भी शामिल हैं जो आपको आर्थिक रूप से समृद्ध कर सकते हैं।
आइए जानते हैं उन सपनों और शुभ संकेतों के बारे में, जिन्हें देखने के बाद यह निश्चित है कि आपके ऊपर लक्ष्मी जी की कृपा बरसेगी ही बरसेगी।
हरियाली देखना
यदि आपको हर रात अपने सपने में हरे-भरे बाग और चारो ओर पेड़-पौधे दिखाई देते हैं तो यह इस बात को स्पष्ट करता है कि आपको बहुत ही जल्द धन प्राप्त होने वाला है। इसके अलावा सपने में लक्ष्मी जी के वाहन उल्लू को देखना भी आपको धन के निकट ले जा सकता है।
शंख की आवाज
सपने के अंदर आपको शंख और मंदिर की घंटियों की आवाज आए तो भी यह इस बात को दर्शाता है कि आपके पास धन की वर्षा होने वाली है।
लाल साड़ी वाली महिला
आप किसी काम से जा रहे हैं और रास्ते में आपको लाल साड़ी पहने, श्रृंगार किए हुए कोई स्त्री दिख जाती है यह इस बात को दर्शाता है कि वह आपके सामने महालक्ष्मी का रूप लेकर आई है। निश्चित तौर पर आपके पास पैसे आने वाले हैं।
फूल का दिखना
सुबह उठते ही अपने सामने गन्ने को देखना धन प्राप्ति का संकेत है। इसके अलावा मोर, श्रीफल, फूल या फूलों की माला देखना भी शुभ संकेत कहा जाता है।

कन्या का सिक्का देना
हिन्दू शास्त्रों में शुक्रवार का दिन महालक्ष्मी का दिन माना गया है। अगर आपको इस दिन कोई कन्या सिक्का पकड़ाए तो यह आपके लिए लकी साबित हो सकता है। इस सिक्के के जरिए आपके ऊपर धन की वर्षा संभव है।
गाय का दिखना
घर से बाहर निकलते ही अगर आपको गाय दिखाई देती है तो यह बहुत शुभ माना जाता है, विशेषकर सफेद गाय ही शुभ संकेत कहा जाएगा, काली गाय देखने से कुछ खास लाभ प्राप्त नहीं होता।
सफेद रंग का सांप
अगर आपको अपने सपने में सफेद या सुनहरे रंग का सांप दिखाई दे तो यह इस बात का संकेत है कि आपके घर पर मां लक्ष्मी की कृपा बरस रही है। संभव है कि आपको जल्द ही बड़ी संपत्ति हाथ लगने वाली हो।
उल्लू दिखना
उल्लू को महालक्ष्मी का वाहन माना गया है। अगर आपको अपने घर या ऑफिस में उल्लू दिखाई देता है तो समझ जाइए कि महालक्ष्मी आपके ऊपर प्रसन्न हैं।
यात्रा
अगर आप किसी यात्रा के लिए जा रहे हैं और रास्ते में आपको अपने दाहिने हाथ की ओर कुत्ता, बंदर, सांप या फिर कोई पक्षी नजर आ जाए तो यह इस बात का संकेत है कि आपकी यात्रा मंगलमय साबित होने वाली है।
कलश के साथ कन्या
शुक्रवार के दिन कोई कन्या आपको पानी से भरा कलश उठाए दिखाई दे तो यह एक अच्छा संकेत कहा जा सकता है। परंतु अगर उसके हाथ में आपने खाली कलश देख लिया है तो आगामी समय में धन से संबंधित कोई नुकसान उठाना पड़ सकता है।


सफाई करना
घर से बाहर निकलते ही कोई व्यक्ति सफाई करता हुआ दिखे तो यह इस ओर इशारा करता है कि धन की देवी लक्ष्मी आपके ऊपर प्रसन्न हैं।
दूध का दिखना
सुबह आंख खोलते ही अगर आपकी नजर दूध, दही या दूध से बने किसी पदार्थ पर पड़ती है तो समझ लीजिए आपका दिन बहुत अच्छा बीतने वाला है।
गाय
धन से जुड़े किसी कार्य को जाते समय अगर रास्ते में गाय नजारा आ जाए तो यहा शुभ संकेत है.
गेंहू दिखाना
अगर सपने में आपको हाथी, घोड़ा, गेंहू नजर आए तो आने वाले समय में आपको धन प्राप्त हो सकता है।
पीले वस्त्र
गुरुवार के दिन किसी कुंवारी कन्या का पीले वस्त्रों मेई दिखना शुभ संकेत समझना चाहिए.
जेब से घन गिरना
धन से जुड़े किसी कार्य के लिए जा रहे हैं और जेब से पैसे गिर जाएं तो यह इस बात की ओर इशारा करता है की काम सफल होगा.
गढ़ा हुआ खजाना
अगर कुत्ता जमीन पारा सिर रगड़ता दिखाई देतो हो सकता है उस स्थान पर गढ़ा हुआ खजाना मिल जाए.
शुभ संकेत का इंतजार
अब बस आप वेट कीजिए कि कब आपको ये संकेत मिलते हैं। बिना काम किए पैसा कमाने का सवाल जो ठहरा।

मंगलवार, 26 जून 2018

मधुराष्टकम्

🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀 🥀🥀🥀 🙏🌷🙏🌷मधुराष्टकम्🌷🙏🌷🙏

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अधरं मधुरं वदनं मधुरं,
नयनं मधुरं हसितं मधुरम्।
हृदयं मधुरं गमनं मधुरं,
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।।1।।

हे कृष्ण! आपके होंठ मधुर हैं, आपका मुख मधुर है, आपकी आंखें मधुर हैं, आपकी मुस्कान मधुर है, आपका हृदय मधुर है, आपकी चाल मधुर है, मधुरता के ईश हे श्रीकृष्ण! आपका सब कुछ मधुर है ।।1।।
वचनं मधुरं चरितं मधुरं,
वसनं मधुरं वलितं मधुरम्।
चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं,
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।।2।।
आपका बोलना मधुर है, आपके चरित्र मधुर हैं, आपके वस्त्र मधुर हैं, आपका तिरछा खड़ा होना मधुर है, आपका चलना मधुर है, आपका घूमना मधुर है, मधुरता के ईश हे श्रीकृष्ण! आपका सब कुछ मधुर है ।।2।।
वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुर:,
पाणिर्मधुर: पादौ मधुरौ।
नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं,
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।।3।।
आपकी बांसुरी मधुर है, आपके लगाए हुए पुष्प मधुर हैं, आपके हाथ मधुर हैं, आपके चरण मधुर हैं, आपका नृत्य मधुर है, आपकी मित्रता मधुर है, मधुरता के ईश हे श्रीकृष्ण! आपका सब कुछ मधुर है। ।।3।।
गीतं मधुरं पीतं मधुरं,
भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरम्।
रूपं मधुरं तिलकं मधुरं,
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।।4।।
आपके गीत मधुर हैं, आपका पीना मधुर है, आपका खाना मधुर है, आपका सोना मधुर है, आपका रूप मधुर है, आपका टीका मधुर है, मधुरता के ईश हे श्रीकृष्ण! आपका सब कुछ मधुर है ।।4।।
करणं मधुरं तरणं मधुरं,
हरणं मधुरं रमणं मधुरम्।
वमितं मधुरं शमितं मधुरं,
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।।5।।
आपके कार्य मधुर हैं, आपका तैरना मधुर है, आपका चोरी करना मधुर है, आपका प्यार करना मधुर है, आपके शब्द मधुर हैं, आपका शांत रहना मधुर है, मधुरता के ईश हे श्रीकृष्ण! आपका सब कुछ मधुर है ।।5।।
गुंजा मधुरा माला मधुरा,
यमुना मधुरा वीची मधुरा।
सलिलं मधुरं कमलं मधुरं,
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।।6।।
आपकी घुंघची मधुर है, आपकी माला मधुर है, आपकी यमुना मधुर है, उसकी लहरें मधुर हैं, उसका पानी मधुर है, उसके कमल मधुर हैं, मधुरता के ईश हे श्रीकृष्ण! आपका सब कुछ मधुर है ।।6।।
गोपी मधुरा लीला मधुरा,
युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरम्।
दृष्टं मधुरं शिष्टं मधुरं,
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।।7।।
आपकी गोपियां मधुर हैं, आपकी लीला मधुर है, आप उनके साथ मधुर हैं, आप उनके बिना मधुर हैं, आपका देखना मधुर है, आपकी शिष्टता मधुर है, मधुरता के ईश हे श्रीकृष्ण! आपका सब कुछ मधुर है ।।7।।
गोपा मधुरा गावो मधुरा,
यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा।
दलितं मधुरं फलितं मधुरं,
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।।8।।
आपके गोप मधुर हैं, आपकी गायें मधुर हैं, आपकी छड़ी मधुर है, आपकी सृष्टि मधुर है, आपका विनाश करना मधुर है, आपका वर देना मधुर है, मधुरता के ईश हे श्रीकृष्ण! आपका सब कुछ मधुर है ।।8।।
श्री कृष्ण शरणम्
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