सोमवार, 6 जुलाई 2015

मिर्त्यु उपरान्त गति विचार



मित्रों वैसे तो किसी को पता नही होता की मिर्त्यु के बाद क्या गति होगी लेकिन ज्योतिष में इस सम्बन्ध में जो योग पढ़ने को मिलें है वो आपकी सेवा में दे रहा हूँ ।

कुंडली में कंही भी यदि गुरु उंच यानी कर्क राशि में हो तो जातक की अंत्येष्ठि धूमधाम से होती है और अगला जन्म में उत्तम कुल में होता है।

यदि उंच का चन्द्र यानी विर्ष राशि का लग्न में हो और कोई पाप ग्रह का उस पर प्रभाव न हो तो सदगति प्राप्त होती है और जातक अपने पीछे गाथाएं छोड़ जाता है।
अष्ठम भाव का राहु जातक को पुण्यात्मा बना देता है और मिर्त्यु के बाद अगला जन्म अच्छे कुल में जन्म होता है।
* मिर्त्यु उपरान्त गति विचार
अष्ठम भाव पर मंगल की dirsti हो और लग्न में मंगल पर नीच राशि के शनि की दिरस्ती हो तो जातक को नर्क में जाना पड़ता है।
अष्ठम भाव के शुक्र पर गुरु की dirsti हो तो मरणौप्रांत वैश्य कुल में जन्म होता है।
यदि अष्ठम भाव पर मंगल और शनि दोनों की पूर्ण dirsti हो तो अकाल मिर्त्यु के योग बनते है।
यदि अष्ठम भाव खाली हो और उस पर किसी भी ग्रह की dirsti न हो तो जातक ब्रह्म लोक को प्राप्त होता है।
लग्न में गुरु चन्द्र कर्क के चोथे में शनि तुला का और सप्तम में मंगल मकर का यदि ये योग घटित हो तो जातक जीवन में कीर्ति अर्जित करते हुवे मिर्त्यु उपरान्त ब्रह्मलीन होता है । ये योग भगवन श्री राम की कुंडली में देखा जा सकता है।
लग्न में उंच का गुरु चन्द्र को देख रहा हो और अष्ठम भाव किसी भी ग्रह के प्रभाव से मुक्त हो तो जातक धार्मिक कार्य करते हुवे मिर्त्यु को प्राप्त हो सदगति प्राप्त करता है।
अष्ठम भाव में मकर या कुम्भ राशि हो और शनि देख रहा हो तो जातक विष्णुलोक को प्राप्त करता है। यदि जन्मकुंडली में चार ग्रह उंच के हो तो जातक निश्चित ही श्रेष्ठ मिर्त्यु प्राप्त करता है और अपने पीछे अक्षय कीर्ति वट स्थापित कर देता है ।
एकादस भाव में सूर्य बुद्ध हो नवम में शनि और अष्ठम में राहु हो तो जातक मोक्ष प्राप्त करता है ।
यदि द्वादस भाव में शनि राहु या केतु के साथ हो या फिर asthmesh के साथ हो या रोगेश से दीर्स्ट हो तो मरने के बाद दुर्गति होती है ऐसा समझना चाहिए।
गुरु लग्न में हो शुक्र सप्तम में चन्द्र कन्या राशि का हो और धनु लग्न में मेष का नवमांश हो तो जातक मिर्त्यु के बाद परम् पद की प्राप्ति करता है।
यदि अष्ठम भाव को शुक्र गुरु चन्द्र तीनो ही देखते हो तो जातक श्री कृष्ण के चरणों में गति प्राप्त करता है ऐसा आर्य ऋषियों का मत है।
तो मित्रों मिर्त्यु उपरान्त गति के ऊपर जो कुछ पढ़ने को मिला वो यहां लिख दिया इस से ज्यादा मुझे कुछ नही पता ।

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