बुधवार, 31 अगस्त 2016

देव गुरू का कन्या मे गोचर का फल



चलिए जानते है देव गुरू का कन्या मे गोचर का फल वैसे तो सब जान ही चुके होगे की क्या असर लाऐगा सभी लग्नो के लिए कन्या बुध की राशी है कई दिन से हवा बना है ऐ योग ऐसा हो सकता है वैसा हो सकता है पर होगा क्या ?? यदि किसी कि जन्म कुडंली मे गुरू पुर्ण बली है योग कारक शुभ फल दायी है तो गोचर मे ऐ योग इस पर भी निर्भर है की बुध की स्थति क्या है यदि वो भी मित्रगत है शुभ है तो दोगुना शुभ फल देगा । हा देव गुरू किसी से भि बैर नही रखते तो थोडा आपको पेट और कफ की परेशानी जरूर देगे जिसमे बहुतो को कई डाॅक्टर बदलने पड सकते है ।




मेष लग्न---लग्न के लिए गुरु का कन्याराशि में भ्रमण षष्ट भाव में है जो की रोग ,ऋण और शत्रु का भाव है , गुरु का कन्या राशि में ये भ्रमण स्वास्थ्य संबंधी समस्याओ में बढ़ोतरी करेगा साथ ही आर्थिक परेशानियां उत्पन्न करेगा, अगर किसीभी प्रकार का धन सम्बन्धी विवाद चल रहा है तो उसे जल्दी से सुलझा लिया जाना चाहिए अन्यथा उसमे और अधिक देरी हो सकती है। धन सम्बन्धी किसी भी प्रकार का बड़ा जोखिम भी नहीं लियाजाये तो ही उचित रहेगा, हालांकि बारहवे स्थान पर दृष्टि से खर्च में कटौती होगी, किसी भी प्रकार के क़ानूनी मसलों को लम्बा न खींचते हुए तुरंत निपटा लिया जाना बेहतर होगा।व्यापार -व्यवसाय में किसी प्रकार के विशेष सकारात्मक परिवर्तन की उम्मीद गुरु के कन्या राशि में इस भ्रमण काल के दौरान नहीं की जानी चाहिए ,परिस्थितियां थोड़ी संघर्ष पूर्ण रह सकती है
उपाय---मंदिर मे नियमित माथा टेके और गुड और चने का प्रसाद बाटे ।

वृषभ लग्न-- वृष जो की धन की राशी है इसलिए आर्थिक मामलो मे काफी अच्छा सुधार तो होना चाहिए गुरु के कन्या राशि में इस भ्रमण के दौरान इस राशि /लग्न के लोगो के लिए चिंताएं समाप्त होने का समय होगा , अभी तक गुरु के चतुर्थ भाव में होने के बावजूद भी शनि और राहु से पीड़ित होने की वजह से जो समस्याए बढ़ी हुई थी वे अब समाप्त होगी , गुरु के कन्या राशि में इस भ्रमण के दौरान गुरु की ग्यारहवे भाव पर दृष्टि से रुक धन प्राप्त होगा साथ ही आय में वृद्धि होगी । पुराने रुके कार्य निपटेंगे और साझेदारों वअधिकारियो से लाभ होगा।स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियों और मानसिक तनाव का अंत होगा , गुरु की नवम दृष्टि यात्रा के योग बना कर उनसे से लाभ दिलवाएगी , अधिकारी वर्गऔर परिवार के बड़ों से लाभ होगा, साथ ही भाग्य में सकारात्मक बदलाव की सम्भावनाएं बनेंगी । वैवाहिक जीवन का आनंद ले पाएंगे और जो अविवाहित हैउन्हें उचित जीवन साथी मिलने के अवसर प्राप्त होंगे। गुरु की कन्या राशि में इस भ्रमण के दौरानजीवन साथी से भी फायदा होगा। क़ानूनी मामलो का निपटारा होगा।
उपाय ---सफेद फूलो से माता लक्ष्मी की उपासना करे उनको सफेद फूल अर्पित करे ।

मिथुन लग्न---इसमे देव गुरू चौथे घर मे गोचर कर रहे जो की खराब है पर फिर भी चुनौतियो से निपटने मे पूरी दिमागी ताकत आप लगाऐगै बस बाजनिष को बदलने मे इस समय गोचर ठीक नही है न ही जमीनी कार्यो मे पैसा लगाऐ । आप खुद फैसला लेगे जो ई होगा और लाभ भी पाऐगे बस किसी के कहने से कोई कदम न उठाए काम को लेकर नुकसान होगा । अपनी पत्नी के नाम से नया ब्यापार चालू कर सकते है । इस समय शादी के नये रिश्तो की शुरूआत से बचे मुश्किल हालाद पैदा हो सकते खासतर वो जो लव विवाह चाहते है वो बचे विवाद बन सकता है ।
उपाय---भगवान गणपति को रोज द्रुवा घास चढाऐ और लड्डू का भोग लगाऐ और प्रसाद बांटे।

कर्क लग्न---गुरु के कन्या राशि में भ्रमण के दौरान कर्क राशि/लग्न वालो को मेह्नत और धनार्जन के प्रयास से लाभ होगा , गुरु उनके नवम भाव अपनी दृष्टि से सुखमय बनाएगा और कर्म का सही फल दिलाएगा , अधिकारी वर्ग और अनुभवियों का सहयोग मिलेगा , विदेश यात्रा से व्यवसाय में तरक्की होगी और लाभ के सुअवसर उपलब्ध होंगे। जो लोग बड़े लम्बे समय से स्थान परिवर्तन या स्थानांतरण का रास्ता देख रहे थे उनके लिए भी गुरु का कन्या राशि में ये भ्रमण बहुत ही शुभ फल प्रदान करने वाला होगा। फिर भी हर सिक्के दो पहलू होते है बस लाभ व सुख की कामना से कर्म न छोडे । अपनी बिजनिष की खास बातो को औरो के शेयर करने से बचे नही तो आप का प्लान व काम खराब होगा । औरो से अभद्र ब्यवहार से बचे खासतर पिता व पार्टनर से ।
उपाय----जब भी काम से लौटे तो माता पिता व पत्नी व बच्चो के लिए कुछ न कुछ खाने को लाऐ और अपने हाथो से दे थोडा समय परिवार के साथ बिताऐ ।
 
सिहं लग्न-----गुरू अभी हाल मे इस राशि से आजाद हुऐ है इस राशि मे चार ग्रहो के दगंल से काफी नुकसान देखने मे आया पर गुरू अब आजाद है और पूर्ण असर मे है । इन राशी वालो को पैसे से सबंधी यानी जिनका पैसा रूका हुआ है वो लौटने के आसार पर है । पारिवारिक सबंधो मे तनाव खत्म होगा पर अपने शब्दो पर नियत्रंण रखे । अधिक चालाकी आपको भारी पड सकती और गुस्सा भी । सभी काम सहजता से हो जाएगे आपके बस औरो को सम्मान देना सीखे ।
उपाय---आटे को भूश कर उसमे चीनी मिला के चीटीयो को डाले और माता पिता के पैर छूके घर से काम के लिए निकले ।
कन्या लग्न---इस राशी मे स्यवः गुरू का गोचर है ऐ राशी ब्यापार की मानी जाती है अतः आपके काम को पूरा फल मिलेगा यदि लोन आप ले रहे है तो मिल जाएगा और आपका फसां पैसा भी आसानी से मिल जाऐगा पर अपने खर्चो पर थोडा लगाम रखे और बचाने की कोशिष करे आप औरो से काफी आगे निकल सकते है यदि खुद के उपर भरोषा रख कर चले तो पैसे का उपयोग उस काम मे करे जिसका अनुभव आपको हो गैरो के साथ काम करने हे पहले उनका अगला पिछला जाच ले फिर पैसा लगाऐ । पैसा आप खूब कमाऐगे अच्छा होगा यदि बेटी व पत्नी के नाम पर सेव करे ।
उपाय---मूगं और जौ को पक्षियो को डाले या रात को सिरहाने जौ रख के सुबह पार्क मे बिखेर दे ।

तुला लग्न---+तुला राशी भोग विलाष के लिए मानी जाती है और गुरू अध्यात्म और सयंम का रूप है ।तुलाराशि /लग्न के जातको के लिए बारहवा भ्रमण होगा , जो शुभफल दायी नहीं माना जाता है। बाहरवे स्थान किसी भी प्रकार के नुकसान , खर्च , हॉस्पिटल , जेल (क़ानूनी विवाद)और वैवाहिक सुख का है अतः इस भ्रमण काल के दौरान खर्च और नुकसान अधिकता बनी रह सकती है , परिवार में अगर किसीको स्वास्थ्य समस्या है तो अत्यन्त सावधानी बरतनी जानी चाहिए , यही सलाहक़ानूनी मामलो में ध्यान रखी जानी चाहिए।ऐसे लोग जो बड़े आर्थिक उतार चढाव सम्बंधित व्यवसाय में है तो उन्हें जोखिम से दूर रहना चाहिए क्योंकि गुरु का कन्या राशि में ये भ्रमण उनके लिए बड़े नुकसान का कारण बन सकता है।
उपाय---एक नारियल के सूखे गोले मे चीनी और आटा भर के किसी खाली जमीन मे छोटा खड्डा खोद के दबा दे ।

वृश्चिक;+++ :गुरु का कन्या राशि में भ्रमण वृश्चिक राशि /लग्न वालो के लिए ग्यारहवा भ्रमण होगा , ग्यारहवा भाव किसी भी प्रकार के लाभ का होता है , साथ ही मित्रो का भी। गुरु के कन्या राशि में इस भ्रमण के दौरान रुके हुए धन कीप्राप्ति होगी, नौकरी व्यापार मेंतरक्की के योग बनेंगे , मित्रो और साझेदारों का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा और इस सहयोग से आशा से अधिक लाभ की प्राप्ति होगी।बृहस्पति का गोचर आपके लाभ भाव में हो रहा है। बृहस्पति आपके दूसरे और पाँचवें भाव का स्वामी है, अत: आर्थिकमामलों के लिए यह गोचर शानदार रहेगा |संतान पक्ष से अच्छी सूचना की प्राप्ति होगी और यदि आप स्वयं विद्यार्थी हैं तो यह गोचर कई उपलब्धि दिलाने वाला होगा |नए मित्र बनेंगे | विवाह योग्य जातकों का विवाह तय हो सकता है | नया अफेयर होने का भी योग बन रहा है, मर्यादाओं का ध्यान रखना जरुरी है |
उपाय---भगवान भैरव की पूजा करे और एक काला गुलाब जामुन कौओ को रखे तथा एक पीपल पर रखे।

धनु लग्न---बृहस्पति का गोचर आपके दशम भाव यानी कि कर्म भाव में हो रहा है, जोकि आपके लग्न और चतुर्थ का स्वामी है जो भी इस राशि के बेरोजगार लोग हैं उनको इस दौरान रोजगार की प्राप्ति होगी जो व्यवसाय कर रहें हैं उनके व्यापारविस्तार का अच्छा समय है उनकी ख्याति बढ़ेगी नया मकान अथवा वाहन लेने का योग भी बन रहा है |
उपाय----मंदिर जाए और माथा टेके रोज और वहां केले दान दे और जब भी गुरू द्वारे जाऐ आलू का दान करते रहे गुरूवार को।

मकर लग्न----बृहस्पति का गोचर आपके नवम भाव में हो रहा है। यह गोचर आपके लिए एक बदलावका गोचर होगा इस गोचर के बाद आपके सोचने और समझने का नजरिया अभी के मुकाबले एकदम बदल जायेगा |विद्यार्थी शिक्षा के लिए यात्रा करेंगे, नौकरी पेशा नौकरी के लिए और व्यापारी व्यापार अथवा तीर्थ यात्राकरेंगे, कुल मिला के कहा जाए तो यह समय यात्राओं की अधिकता होगी और इन यात्राओं से आपको लाभ होगा |
उपाय---++-एक मुठ्ठी बादाम शनी मंदिर मे चढा के आऐ और स्त्रियो की सेवा व सम्मान करे । लक्ष्मी पूजन करे व विषेश दिन करवाऐ घर मे ।

कुम्भ लग्न---बृहस्पति का गोचर आपके अष्टम भाव मेंहो रहा है। बृहस्पति आपके दूसरे और लाभ भाव का स्वामी है, अत: इस गोचर का संकेत यही है कि किसी बड़े निवेश से बचें अचानक बड़ी धन-हानि की सम्भावना है किसी भी प्रकार के विवाद से बचें, खासतौर से पैत्रक संपत्ति से सम्बंधित विवाद आपके पक्ष में नहीं रहेगा सम्बन्धियों से ऐसी भाषा का प्रयोग करें जिस से आप दोबारा उनसे बात करें तो शर्मिंदा ना हो मानसिक तौर पर अशांति का अनुभव हो सकता है |
उपाय---घर मे गंगाजल की अधिकता रखे पूर्व दिशा को साफ रखे पत्नी से मुटाव होता हो तो बेडरूम मे हल्की लाइट रखे और चांदी की गोली एक कटोरी मे गंगाजल मे डाल के रखे ।

मीन लग्न----बृहस्पति आपके सप्तम भाव में गोचर कररहा है। यह आपका राशि स्वामी होने के साथ-साथ कर्मेश भी। जोकि कर्म क्षेत्र में सफलता इंगित करता है ।
उपाय--घर मछली एक्यूरम रखे जिसमे 7सुनहरी एक काली मछली हो रोज पानी बदले

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