रविवार, 22 मार्च 2015

भारतीय नववर्ष विक्रम् संवत् 2072 का वर्षफल

भारतीय नववर्ष विक्रम् संवत् 2072 का वर्षफल : (A separate update being posted in English)

चैत्र नवरात्र - घटस्थापना मुहूर्त :
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हिंदू नव वर्ष का प्रारंभ माना जाता है। इसी दिन से देवी मां की आराधना का विशेष पर्व चैत्र नवरात्र भी प्रारंभ हो रहा है और इस दिन गुड़ी पड़वा भी है।
इस वर्ष ये नवरात्र ८ दिन का रहेगा। इस साल चैत्र नवरात्र 21 मार्च 2015 (शनिवार) से शुरु होंगे और 29 मार्च 2015 को खत्म होंगे। इन दिनों में मां दुर्गा की विशेष आराधना की जाती है। ऐसी मान्यता है कि नवरात्र में किए गए पूजन और व्रत-उपवास से देवी मां बहुत ही जल्दी प्रसन्न होती हैं। लाल फूल, नारियल, प्रसाद आदि अर्पित करना चाहिए।
चैत्र नवरात्र घटस्थापना मुहूर्त :
सुबह 6 बजकर 28 मिनट से लेकर 7 बजकर 35 मिनट तक का है।
प्रात: ८:१५ बजे से प्रात: ९:४५ बजे के बीच शुभ
तथा दोपहर १२:२१ बजे से दोपहर १३:०९ बजे तक शुभ अभिजीत मुहूर्त रहेगा|
(8.02 से 9.33 तक शुभ चौघड़िया होने से यह समय भी शुभ है तथा दोपहर 12.34 से शाम 5.07 बजे तक चर, लाभ व अमृत के चौघड़िये में भी घटस्थापना कर सकते हैं।)
नव वïर्ष विक्रम संवत् 2072 (कीलक संवत्सर) का प्रारंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा अर्थात 21 मार्च से हो रहा है। देश और दुनिया के लिये नववर्ष कैसा रहेगा, यह मैं पहले ही लिख चुका हूँ। आज हम देखते हैं, कि अलग-२ राशियों पर इसका क्या प्रभाव होगा ?
इस नए विक्रम संवत् २०७२ में रोहिणी नक्षत्र का वास समुंद्रीय जल में होना माना जा रहा है। रोहिणी नक्षत्र अघ्र्वमुख, सतोगुणी है। देवों में इसके स्वामी ब्रह्मा हैं तो ग्रहों में इसके स्वामी चन्द्रमा है। ब्रह्मा के स्वामी होने से यह वृषभ राशि के अन्तर्गत आता है तथा चन्द्रमा के स्वामी होने की स्थिति में शुक्र राशि के अन्तर्गत भी आता है। पृथ्वी के पर्यावरण का जलमय क्षेत्र चन्द्रमा से प्रभावित होता है। समुद्र के जल में विनाशक उछाल, लहरों की तटनाशक झपट, ज्वारभाटा का संबंध चन्द्रमा के प्रभाव से है।
1. मेष राशि
इस राशि का स्वामी मंगल नए वर्ष का मंत्री है एवं मेष राशि पर राजा शनि का ढय्या भी चल रहा है। इस कारण ये लोग ठीक से निर्णय नहीं कर पाएंगे। हर कार्य में परेशानियों के साथ धन की कमी हो सकती है। अज्ञात भय और चिंता रहने की संभावनाएं हैं।
[२] वृष राशि-
वर्ष का राजा शनि आपकी राशि के स्वामी शुक्र का मित्र है एवं उस पर दृष्टि भी रखता है। अत: आपके लिए यह वर्ष उत्तम रहने की संभावनाएं है। पुराने समय से अटके हुए कार्य पूर्ण होंगे। धन संबंधी कार्यों में भी लाभ होगा।
[३] मिथुन राशि-
इस राशि का स्वामी बुध है। शनि और बुध मित्रता का भाव रखते हैं। इस कारण नए साल में सभी प्रकार से शुभ फल प्राप्त होंगे। सभी परिस्थितियां अनुकूल रहने की संभावनाएं हैं। नुकसान से बचे रहेंगे। धन लाभ रहेगा। नई जिम्मेदारी प्राप्त हो सकती है।
[४] कर्क राशि-
शनि इस राशि के स्वामी चंद्र से शत्रुता रखता है, लेकिन वर्ष का मंत्री मंगल मित्र है। मंगल की वजह से कार्य बनते जाएंगे। इस वर्ष सबसे प्रबल राशियों में से एक कर्क राशि रहेगी। अटके कार्य पूर्ण होंगे। विवादों में विजय प्राप्त होगी।
[५] सिंह राशि-
इस राशि का स्वामी सूर्य है और यह शनि से शत्रुता रखता है। मंगल और सूर्य मित्र हैं। जुलाई से गुरु इस राशि में प्रवेश करेगा। इस कारण यह राशि भी मजबूत स्थिति में रहेगी। आर्थिक लाभ होगा। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी।
[६] कन्या राशि-
इस राशि में राहु का गोचर वर्ष भर रहेगा। वर्ष का राजा शनि और इस राशि का स्वामी बुध, दोनों मित्र हैं। कार्यों में आ रही बाधाएं समाप्त होंगी। धन लाभ होगा एवं विरोधी परास्त होंगे।
[७] तुला राशि-
शनि और तुला राशि का स्वामी शुक्र, दोनों मित्र हैं। इस कारण आपकी परेशानीयों का अंत होगा। जिन अविवाहित लोगों के विवाह में बाधाएं आ रही हैं, वे बाधाएं समाप्त होंगी। नौकरी में तरक्की एवं व्यापार में लाभ होने के आसार हैं। न्यायालयीन मामलों में सफलता मिलेगी।
[८] वृश्चिक राशि-
शनि इसी राशि में स्थित है और शनि नए वर्ष का राजा है। वृश्चिक राशि पर शनि की साढ़ेसाती भी है। नए वर्ष का मंत्री मंगल इस राशि का स्वामी है। इस कारण आपकी राशि पूरे वर्ष ताकतवर बनी रहेगी। कई कार्यों को पूरा करने में सफल हो जाएंगे। इन लोगों को वाद-विवाद का भी सामना करना पड़ सकता है, लेकिन जीत आपकी होगी।
[९] धनु राशि-
ये राशि इस वर्ष सामान्य रहेगी। शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव रहेगा। स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो सकती है। आर्थिक मामलों में भी कमजोरी रहेगी। घर-परिवार में भी इन लोगों की स्थिति कमजोर हो सकती है।
[१०] मकर राशि-
शनि इस राशि का स्वामी है। पूरे वर्ष शनि अपने शत्रु मंगल की राशि में रहेगा, लेकिन शनि की यह स्थिति मकर राशि के लिए लाभदायक रहेगी। निवेश लाभदायक रहेंगे। विरोधी परास्त होंगे। खुशियां बनी रहेंगी।
[११] कुंभ राशि-
इस राशि का स्वामी भी वर्ष का राजा शनि ही है। यह राशि पूरे वर्ष शक्तिशाली बनी रहेगी। लाभ की स्थितियां बनेंगी। योजनाएं सफल होंगी। लक्ष्य साधने में सफल होंगे। पुराने नुकसान की भरपाई होगी।
[१२] मीन राशि-

इस वर्ष यह राशि सामान्य रहेगी। राशि स्वामी गुरु की दृष्टि एवं जुलाई के बाद से गुरु का षष्ठम होना, सभी प्रकार से मंगलदायक रहेगा। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी एवं करियर में लाभ प्राप्त होगा।

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