रविवार, 11 अगस्त 2019

*पृथ्वी की ये 9 प्रकार की जानकारी ANK GADNA

*पृथ्वी की ये 9 प्रकार की जानकारी आपको कहीं और न मिलेगा न कोई बताएगा:-* 👇🏻
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*दो लिंग नर और नारी ।
*दो पक्ष शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष।
*दो पूजा वैदिकी और तांत्रिकी (पुराणोक्त)। *दो अयन उत्तरायन और दक्षिणायन।


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*तीन देव ब्रह्मा, विष्णु, शंकर।
*तीन देवियाँ महा सरस्वती, महा लक्ष्मी, महा गौरी।
*तीन लोक पृथ्वी, आकाश, पाताल।
*तीन गुण सत्वगुण, रजोगुण, तमोगुण।
*तीन स्थिति ठोस, द्रव, वायु।
*तीन स्तर प्रारंभ, मध्य, अंत।
*तीन पड़ाव बचपन, जवानी, बुढ़ापा।
*तीन रचनाएँ देव, दानव, मानव।
*तीन अवस्था जागृत, मृत, बेहोशी।
*तीन काल भूत, भविष्य, वर्तमान।
*तीन नाड़ी इडा, पिंगला, सुषुम्ना।
*तीन संध्या प्रात:, मध्याह्न, सायं।
*तीन शक्ति इच्छाशक्ति, ज्ञानशक्ति, क्रियाशक्ति।
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*चार धाम बद्रीनाथ, जगन्नाथ पुरी, रामेश्वरम्, द्वारका।
*चार मुनि सनत, सनातन, सनंद, सनत कुमार।
*चार वर्ण ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र।
*चार निति साम, दाम, दंड, भेद।
*चार वेद सामवेद, ॠग्वेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद।
*चार स्त्री माता, पत्नी, बहन, पुत्री।
*चार युग सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग, कलयुग।
*चार समय सुबह, शाम, दिन, रात।
*चार अप्सरा उर्वशी, रंभा, मेनका, तिलोत्तमा।
*चार गुरु माता, पिता, शिक्षक, आध्यात्मिक गुरु।
*चार प्राणी जलचर, थलचर, नभचर, उभयचर।
*चार जीव अण्डज, पिंडज, स्वेदज, उद्भिज।
*चार वाणी ओम्कार्, अकार्, उकार, मकार्।
*चार आश्रम ब्रह्मचर्य, ग्राहस्थ, वानप्रस्थ, सन्यास।
*चार भोज्य खाद्य, पेय, लेह्य, चोष्य।
*चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष।
*चार वाद्य तत्, सुषिर, अवनद्व, घन।
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*पाँच तत्व पृथ्वी, आकाश, अग्नि, जल, वायु।
*पाँच देवता गणेश, दुर्गा, विष्णु, शंकर, सुर्य।
*पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ आँख, नाक, कान, जीभ, त्वचा।
*पाँच कर्म रस, रुप, गंध, स्पर्श, ध्वनि।
*पाँच उंगलियां अँगूठा, तर्जनी, मध्यमा, अनामिका, कनिष्ठा।
*पाँच पूजा उपचार गंध, पुष्प, धुप, दीप, नैवेद्य।
*पाँच अमृत दूध, दही, घी, शहद, शक्कर।
*पाँच प्रेत भूत, पिशाच, वैताल, कुष्मांड, ब्रह्मराक्षस।
*पाँच स्वाद मीठा, चर्खा, खट्टा, खारा, कड़वा।
*पाँच वायु प्राण, अपान, व्यान, उदान, समान।
*पाँच इन्द्रियाँ आँख, नाक, कान, जीभ, त्वचा, मन।
*पाँच वटवृक्ष सिद्धवट (उज्जैन), अक्षयवट (Prayagraj), बोधिवट (बोधगया), वंशीवट (वृंदावन), साक्षीवट (गया)।
*पाँच पत्ते आम, पीपल, बरगद, गुलर, अशोक।
*पाँच कन्या अहिल्या, तारा, मंदोदरी, कुंती, द्रौपदी।
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*छ: ॠतु शीत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, बसंत, शिशिर।
*छ: ज्ञान के अंग शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द, ज्योतिष।
*छ: कर्म देवपूजा, गुरु उपासना, स्वाध्याय, संयम, तप, दान।
*छ: दोष काम, क्रोध, मद (घमंड), लोभ (लालच), मोह, आलस्य।
*xxxxxxxxxx 06 xxxxxxxxxx* *सात छंद गायत्री, उष्णिक, अनुष्टुप, वृहती, पंक्ति, त्रिष्टुप, जगती।
सात स्वर : सा, रे, ग, म, प, ध, नि।
*सात सुर षडज्, ॠषभ्, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत, निषाद।
*सात चक्र सहस्त्रार, आज्ञा, विशुद्ध, अनाहत, मणिपुर, स्वाधिष्ठान, मुलाधार।
*सात वार रवि, सोम, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि।
*सात मिट्टी गौशाला, घुड़साल, हाथीसाल, राजद्वार, बाम्बी की मिट्टी, नदी संगम, तालाब।
*सात महाद्वीप जम्बुद्वीप (एशिया), प्लक्षद्वीप, शाल्मलीद्वीप, कुशद्वीप, क्रौंचद्वीप, शाकद्वीप, पुष्करद्वीप।
*सात ॠषि वशिष्ठ, विश्वामित्र, कण्व, भारद्वाज, अत्रि, वामदेव, शौनक।
*सात ॠषि वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र, भारद्वाज।
*सात धातु (शारीरिक) रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा, वीर्य।
*सात रंग बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल।
*सात पाताल अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल, पाताल।
*सात पुरी मथुरा, हरिद्वार, काशी, अयोध्या, उज्जैन, द्वारका, काञ्ची।
*सात धान्य उड़द, गेहूँ, चना, चांवल, जौ, मूँग, बाजरा।
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*आठ मातृका ब्राह्मी, वैष्णवी, माहेश्वरी, कौमारी, ऐन्द्री, वाराही, नारसिंही, चामुंडा।
*आठ लक्ष्मी आदिलक्ष्मी, धनलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, गजलक्ष्मी, संतानलक्ष्मी, वीरलक्ष्मी, विजयलक्ष्मी, विद्यालक्ष्मी।
*आठ वसु अप (अह:/अयज), ध्रुव, सोम, धर, अनिल, अनल, प्रत्युष, प्रभास।
*आठ सिद्धि अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व।
*आठ धातु सोना, चांदी, ताम्बा, सीसा जस्ता, टिन, लोहा, पारा।
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*नवदुर्गा शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कुष्मांडा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री।
*नवग्रह सुर्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु।
*नवरत्न हीरा, पन्ना, मोती, माणिक, मूंगा, पुखराज, नीलम, गोमेद, लहसुनिया।
*नवनिधि पद्मनिधि, महापद्मनिधि, नीलनिधि, मुकुंदनिधि, नंदनिधि, मकरनिधि, कच्छपनिधि, शंखनिधि, खर्व/मिश्र निधि।
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*दस महाविद्या काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्तिका, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला।
*दस दिशाएँ पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, आग्नेय, नैॠत्य, वायव्य, ईशान, ऊपर, नीचे।
*दस दिक्पाल इन्द्र, अग्नि, यमराज, नैॠिति, वरुण, वायुदेव, कुबेर, ईशान, ब्रह्मा, अनंत।
*दस अवतार (विष्णुजी) मत्स्य, कच्छप, वाराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध, कल्कि।
*दस सति सावित्री, अनुसुइया, मंदोदरी, तुलसी, द्रौपदी, गांधारी, सीता, दमयन्ती, सुलक्षणा, अरुंधती।

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