बुधवार, 22 फ़रवरी 2017

मूलांकों/भाग्यांकों/नामांकों, वास्तुशास्त्र नियमानुसार जातकों व गृह आवास के नियमानुसार जीवन के कर्म व घटना


     
            निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि विभिन्न जातक/ जातिकाओं के हस्तरेखाओं, ग्रहों के पर्वतों, उनके जन्मांक के मूलांकों/भाग्यांकों/नामांकों, वास्तुशास्त्र नियमानुसार जातकों व उनके गृह आवास के नियमानुसार उनके जीवन के कर्म व घटनाओं में काफी कुछ समानताएं लिए हुए होते हैं। किसी-किसी के मूलांकों, तो किसी-किसी के भाग्यांकों, तो किसी-किसी के नामांकों के आधार पर भी हस्तरेखाओं एवं ग्रह पर्वतों में समानताएं होती हैं। यदि किसी प्रकार से जातक/जातिकाओं में ताल-मेल नहीं बैठ रहा हो तो नामांक बदलने के लिए अंतिम अक्षरों में से कुछ परिवर्तन कर नाम को तो बदला जा सकता है किंतु उनके मूलांक व भाग्यांक को नहीं बदला जा सकता। नाम के अंतिम अक्षर में कोई भी उचित अक्षर प्रयोग करके जीवन को अच्छा या सुखमय बनाने का प्रयास किया जा सकता है। उसका आधार अंक कुंडली में यह देखकर किया जा सकता है कि जातक को किस ग्रह और योग की आवश्यकता है। अंक कुंडली वैवाहिक जीवन में भी बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है जो योग लड़की की कुंडली में नही है, वह योग यदि लड़के की कुंडली में हुआ हो तो वह जीवन में सामंजस्य बिठाने में सहायक होता है।




     इसी भांति उत्तरोत्तर ज्योतिष शास्त्र की कई शाखाएं विकसित होती गई जैसे सामुद्रिक शास्त्र, प्रश्नशास्त्र, अंक शास्त्र, लाल किताब, संहितादि। फलित ज्योतिष के साथ-साथ धीरे-धीरे अधिकांश विद्वानों का ध्यान बहुत     प्राचीनकाल से ही सामुद्रिक शास्त्र, अंकशास्त्र और वास्तुशास्त्र के समानताओं की ओर गया और इन पर उन्होंने अनेकानेक शोध किये और इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि किसी भी परिणाम का प्रारंभ और अंत अंक ही है। अंक शास्त्र से यह जाना जा सकता है कि जातक/जातिका के लिए भूत, भविष्य, वर्तमान समय में क्या कुछ उनके जीवन में घटित हुआ, हो रहा है और होगा ?


 अंक ज्योतिष का वर्तमान रूप पाश्चात्य सभ्यता की देन है, जिसके अंतर्गत इस्वी सन की तारीख से मूलांक, तारीख, माह, और सन के अलग-अलग अंकों के योग के संपूर्ण योग से भाग्यांक और अंग्रेजी के अक्षरों के अंकों को जोड़कर नामांक ज्ञात कर फलादेश किया जाता है। इनमें विभिन्न विद्वानों के नामांक अंक कुछ भिन्न हैं।
कुछ आधुनिक विद्वानों ने सामुद्रिक शास्त्रानुसार कई जातक/जातिकाओं के हाथों की रेखाओं व विभिन्न ग्रहों के पर्वतों का अध्ययन कर उनके मूलांक, भाग्यांक एवं नामांक का विश्लेषण कर इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि किस अंक से कौन-कौन अंक प्रभावित हैं

उनके तथ्यों के आधार पर मैंने भी कुछ जातक/जातिकाओं के हस्तरेखाओं एवं विभिन्न ग्रहों के पर्वतों का अध्ययन कर उनके मूलांक/भाग्यांक /नामांक का विश्लेषण कर इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि अंकशास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र एवं उनके घर के वास्तु सामंजस्य संबंधी फलादेश में बहुत ही समानताएं हैं और खास करके उनके करियर निर्धारण संबंधी फलादेश में भी बहुत सी समानताएं हैं।

 अंकशास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र एवं वास्तुशास्त्र में समानताएं अंकशास्त्र, हस्तरेखा शास्त्र एवं वास्तु शास्त्र के आधार पर विभिन्न मूलांकों के जातक/जातिकाओं का तुलनात्मक अध्ययन निम्नानुसार प्रस्तुत कर रहा हूं। सुविज्ञ पाठक/साधक/विद्वान इसका अध्ययन कर अपनी-अपनी हस्तरेखाओं व मूलांक/भाग्यांक/नामांक, निर्धारण कर अपने वर्तमान एवं भविष्य को सुधार सकते हैं। ऐसा करके मुझे कृतार्थ कर अनुगृहीत करने की कृपा करेंगे।

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