गुरुवार, 9 मार्च 2017

नारी तो बस नारी है।



मैं नारी हूँ मुझ में सती है
मैं नारी हूँ मुझ में गति है
मैं नारी हूँ मुझ में यति है
मैं नारी हूँ मुझ में मति है

मैं नारी हूँ मुझ में रीती है
मैं नारी हूँ मुझ से प्रीति है

मैं ही माई मैं ही दाईं
मैं ही बहूं मैं ही बेटी
मैं बहना मैं ही भाभी
मैं ननद मैं हूँ भौजाई
मैं ही बुआ मैं ही मौसी
मैं ही दादी मैं ही बुआ
मैं गृहणी मैं सुहागिनी

मैं ही आद्या मैं ही विद्या
मैं ही आर्या मैं ही भार्या
मैं ही चित्रा मैं ही मित्रा
मैं ही चिता मैं ही सीता
मैं ही भद्रा मैं ही रुद्रा
मैं ही रमा मैं ही पद्मा
मैं ही आस्था मैं ही श्रद्धा
मैं ही इंदु व मैं ही इंदिरा
मैं ही ममता मैं ही करुणा
मैं ही रूपा मैं ही दीपा
मैं ही सत्या मैं ही सरिता

सुंदरी भी मैं सुरसुन्दरी भी मैं
यामिनी भी मैं दामिनी भी मैं
ब्राह्मी भी मैं ही ब्राह्मणी भी मैं
काम्या भी मैं ही कामिनी भी मैं
राधा भी मैं ही व रजनी भी मैं
प्रत्यक्षा भी मैं ही परीक्षा भी मैं
सुधा भी मैं ही व सुविधा भी मैं
धरा भी मैं ही व वसुधा भी मैं

मैं ही प्रकृति मैं ही आकृति हूँ
मैं ही विकृति मैं ही स्वीकृति हूँ

मुझसे ही ये जगत है
मुझसे ही ये संसार है
मुझसे ही है ये दुनिया
मुझसे ही मस्ती मजा है

मैं न होती तो ये दुनिया भी न होती
मुझ बिन बताएं दुनिया कैसे चलती

जिव जगत को मैंने ही जन्मा है
अफ़सोस फिर भी मैं अजन्मा हूँ

जिसने सबको जना ही उसके ही साथ अत्याचार क्यों है,
महिला के साथ ही इतना दुराचार और अत्याचार क्यों है

पुरुष प्रधान इस दुनिया में नारी को कभी भी न्याय नही मिल सकता,
कविताएं होंगी भाषण होंगे लेकिन बराबरी का हक नही मिल सकता,

हाँ थोड़ा बहुत सुधार जरूर हुआ है
मग़र इसमें पुरुषों का योगदान नही है
ये तो सब परिस्थिती वश सब हुआ है
पुरुष न पहले न अब हक देना चाहते है

सब कुछ ढोंग है सब कुछ दिखावा है
नारी के संग अब तक हुआ छलावा है

जो करना है नारी को खुद ही कुछ करना होगा,
वरना पहले भी सहा है व आगे भी सहना होगा
.....

///नारी का गुणगान ना आँको भैया   नारी तो बस नारी है।
अनंत काल से आज तक
नारी ही रही है
जिसने हर
कठिन समय में भी
कंधे से कंधा मिला
दिया पुरुषों का साथ।

फिर भी पुरुषप्रधान
इस देश में ना
मिल सका
नारी को मान...
नारी तो बस नारी है।
प्यार और दुलार की मूर्ति नारी
ममता की मूर्ति है न्यारी
बच्चों से लेकर बूढ़ों तक
सभी को सँवारती है
यह नारी।
कभी सास तो कभी बहू
कभी बेटी तो कभी माँ
बनकर हर उम्मीद पर
खरी उतरती है नारी।
नारी तो बस नारी है
उसकी महिमा जो
समझ जाएँ
वह इस दुनिया से तर जाएँ
नारी का सम्मान करो
उसे भी उड़ने दो
गगन में अपनी स्वतंत्रता से
और फिर देखो
नारी का असली रूप
जो कभी दुर्गा, तो कभी सरस्वती
कभी लक्ष्मीबाई तो कभी कालका
का रूप दिखाकर
जग को न्याय का उचित
रास्ता दिखलाती है नारी
नारी तो बस नारी है
नारी तो बस नारी है।

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