मंगलवार, 1 मई 2018

महामृत्युंजय मंत्र के 9 विशेष लाभ -

महामृत्युंजय मंत्र के 9 विशेष लाभ -

*ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥*
*मृत्युंजय का सीधा अर्थ है
मृत्यु पर भी विजय करने वाला,

महामृत्युञजय मंत्र भगवान रूद्र का एक सर्वशक्तिशाली , तत्काल और साक्षात् प्रभाव देने वाला सिद्ध मंत्र है और अधिकांशतः लोग इससे परिचित भी हैं ही।
इस को समान्यतया अच्छे स्वास्थ के लिए, असाध्य रोगों से मुक्ति के लिए और अकाल मृत्यु-भय से रक्षा के लिए महामृत्युंजय मंत्र जाप किया जाता है या कर्मकाण्डी ब्राह्मण से इसका अनुष्ठान कराया जाता है
पर महामृत्युंजय मंत्र का प्रयोग न केवल अकाल मृत्यु से रक्षा के लिए बल्कि आपके जीवन की और भी बहुतसी बाधाओं से मुक्ति देने में भी इस का जाप चमत्कारिक प्रभाव दिखाता है -
*1. यदि आपका स्वास्थ समान्य से अधिक और हमेशा की खराब रहता है तो नित्य महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें अवश्य लाभ होगा।*
*2. बीमारी या रोगों के कारण जब जीवन संकट वाली स्थिति आ जाये तो महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें या अनुष्ठान कराएं।*
*3. जिन लोगों के साथ बार बार एक्सीडेंट्स की स्थिति बनती रहती हो ऐसे लोगो को महामृत्युंजय मंत्र का नित्य जाप करना बहुत सकारात्मक परिवर्तन लाता है।*
*4. जिन लोगों को डर भय और फोबिया की समस्या हो ऐसे लोगों को महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना बहुत शुभ परिणाम देता है।*
*5. आज हर घर में वाहन है । आप वाहन द ुर्घटना से आत्म रक्षा को भी
इस मंत्र का प्रयोग कर सकते है
एक सफ़ेद कागज पर लाल पैन से महामृत्युंजय मंत्र लिखें एक दिन के लिए अपने पूजास्थल पर रखें और फिर हमेशा वाहन चलाते समय इसे अपने ऊपर वाले जेब में रखें ऐसे करने से दुर्घटनाओं से हमेशा आपकी रक्षा होगी।*
*6. जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प योग होने से जीवनं में संघर्ष रहता हो उनके लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप अमृत-तुल्य होता है।
*7. कुंडली में चन्द्रमाँ पीड़ित या कमजोर होने पर उत्पन्न होने वाली मानसिक समस्याओं में भी महामृत्युंजय मंत्र का जाप बहुत शुभ परिणाम देता है।*
*8. महामृत्युंजय मंत्र की ध्वनि से घर से सभी नकारात्मक ऊर्जाएं दूर रहती हैं।*
*9. आपसी रिश्तों की तना-तन्नी में , दुनियादारी में मान सम्मान में भी महामृत्युंजय मंत्र एक राम बाण इलाज है ।
नमः शिवाय
ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः
ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्‍धनान्। मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात्
ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ ।

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