गुरुवार, 16 नवंबर 2017

स्त्रियों के ८ अवगुण :-

रावण ने बताया था स्त्रियों के ८ अवगुण :-
रावण ने बताया था स्त्रियों के ८ अवगुण के बारे में। मंदोदरी रावण को समझाती है और उसे राम से युद्ध करने से रोकती है। रावण मंदोदरी को समझाते हुए कहता है। तुम बहुत भोली हो तुम स्त्री स्वभाव बस डर कर ऐसा बोल रही हो।
नारि सुभाऊ सत्य सब कहहीं। अवगुन आठ सदा उर रहहीं।।
साहस अनृत चपलता माया। भय अबिबेक सौच अदया।।

१) साहस -स्त्रियों में साहस पुरुषों से कई गुना ज्यादा होता है। इसको हम दुस्साहस भी कह सकतें है। कई बार स्त्रियां अपने क्षमता के विपरीत दुस्साहस कर बैठती हैं जिससे उन्हें बाद में पछताना पड़ता है।
२) अनृत - अनृत अर्थात झूठ बोलना वैसे तो अपने दैनिक व्यवहार में स्त्री पुरुष दोनों झूठ बोलते है लेकिन झूठ बोलने के प्रवृति स्त्रियों में पुरषों से कई गुना पाई जाती है। जिसके कारण स्त्रियों के बात पर लोग काम विश्वास करते हैं।
३) चपलता -स्त्रियां स्वभाव से चंचल होती हैं। जिसके कारण वो एक बात पर ज्यादा देर तक नहीं टिक सकती। उनका किसी एक बात पर दृढ़ निर्णय रख पाना इस चंचल स्वभाव के कारण असम्भव प्रतीत होता है।
४) माया -स्त्रियों को स्वभाव मायावी होता है। वो अपना कार्य सिद्ध करने के लिए कई तरह के मायावी रूप धरती हैं। अपना काम करवाने के लिए वो रूठती हैं प्रलोभन देती हैं। रावण मंदोदरी से कहता है कि तुम इसी तरह मुझे राम का भय दिखाकर सीता को वापस करने की बात कर रही हो।
५) भय -रावण कहता है की स्त्रियां स्वभाव से डरपोक होती है। वो जल्दी भयभीत हो जाती हैं। ज्यादा साहसी होने के साथ साथ उनके अंदर भय भी बहुत पाया जाता है। मंदोदरी तुम एक बन्दर के द्वारा लंका में उछल कूद मचा देने से भयभीत होकर राम से संधि की बात कर रही हो।
६) अविवेक- रावण के कहे अनुसार स्त्रियां अपने अविवेक के कारण कुछ दुस्साहस भरे कार्य कर जाती हैं जिसके बाद उन्हें पछताना पड़ता है।
७) अशौच - स्त्रियों में प्राकृतिक रूप से अपवित्रता ज्यादा होती है। स्त्रियों रजस्वला के कारण अपवित्र बताई गयीं हैं और बहुत से स्त्रियों की रहने सहने के ढंग भी इनके फूहड़ता को प्रमाणित करते हैं।
८) अदाया - स्त्री को निर्दयी बताया गया है। रावण के अनुसार स्त्री में अपने परिवार जानो को छोड़ कर दूसरे जीवन के प्रति दया का अभाव पाया जाता है
रावण महा ज्ञानी था। राक्षस जाती का होने के बावजूद उसमे ज्ञान और विवेक की कमी नहीं थी। अपने राक्षस स्वभाव बस उसने राम से द्वेष किया लेकिन अपने परिवार और कुटुंब के उद्धार के लिए उसने सदैव नीति और बुद्धिमानी से काम लिया। रावण जनता था कि विभीषण और रावण का उद्धार राम भक्ति से हो सकता है लेकिन समस्त राक्षस जाती स्वभाव बस राम विमुख है। इनका उद्धार राम के हाथो मरने से ही होगा। इसलिए भक्त विभीषण को राम के शरण में जाने दिया और खुद राम से बैर रखा। जब मंदोदरी रावण को राम से युद्ध न करने के लिए समझती है तो रावण उसको स्त्रियों के आठ अवगुण का बोध कराकर टालने की कोशिश करता है.
जय श्री राम ।

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