सोमवार, 11 सितंबर 2017

*।श्राद्धकर्म बिशेष ।*



*ॐ जय श्री  बाबा महाकाल* *।श्राद्धकर्म बिशेष ।*

*श्राद्धकाल मे ब्राह्मण भोजन के समय घर के सदस्य पितृ मंत्र का जाप, पितर गायत्री मंत्र का जाप अथवा रक्षोघ्न सूक्त, पितृसूक्त, या पितृस्तोत्र का पाठ कर सकते है ।*

*ऐसा करने से पितर अत्यधिक प्रसन्न, संतुष्ट तथा शीघ्र आकर्षित होते है, और श्राद्ध का पुण्य प्रभाव लाखों गुणा बढ जाता है ।*

*श्राद्धो मे पितरों के गायत्री मंत्र का जप आवश्यक है । श्राद्ध के प्रारम्भ, मध्य, तथा अंतिम मे निम्नलिखित पितृगायत्री का जप करना चाहिए :-*
1. *पितृ मंत्र :-*
*ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च*
*नमः स्वाहायै स्वाधायै नित्यमेव नमो नमः।*
2. *सरल पितृ मंत्र :-*
*॥ ॐ पितृभ्यः नमः ॥*
3. *सरल पितृगायत्री :-*
*ॐपितृ गणाय विदमहे, जगत धारिणे धीमहि*
*तन्नो पित्रो प्रचोदयात् ॥*
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4. *पुराणोक्त पितृ -स्तोत्र :-*
*अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम्।*
*नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम्।।*
*इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा।*
*तान् नमस्याम्यहं सर्वान् पितृनप्सूदधावपि।।*
*नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा।*
*द्यावापृथिव्योश्च तथा नमस्यामि कृतांजलिः।।*
*देवर्षीणां जनितृंश्च सर्वलोकनमस्कृतान्।*
*अक्षय्यस्य सदा दातृन् नमस्येऽहं कृतांजलिः।।*
*प्रजापतं कश्यपाय सोमाय वरूणाय च।*
*योगेश्वरेभ्यश्च सदा नमस्यामि कृतांजलिः।।*
*नमो गणेभ्यः सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु।*
*स्वयम्भुवे नमस्यामि ब्रह्मणे योगचक्षुषे।।*
*सोमाधारान् पितृगणान् योगमूर्तिधरांस्तथा।*
*नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम्।।*
*अग्निरूपांस्तथैवान्यान् नमस्यामि पितृनहम्।*
*अग्निषोममयं विश्वं यत एतदशेषतः।।*
*ये तु तेजसि ये चैते सोमसूर्याग्निमूर्तयः।*
*जगत्स्वरूपिणश्चैव तथा ब्रह्मस्वरूपिणः।।*
*तेभ्योऽखिलेभ्यो योगिभ्यः पितृभ्यो यतमानसः।*
*नमो नमो नमस्ते मे प्रसीदन्तु स्वधाभुजः।।*

*अर्थ:- जो सबके द्वारा पूजित, अमूर्त, अत्यन्त तेजस्वी, ध्यानी तथा दिव्यदृष्टि सम्पन्न हैं, उन पितरों को मैं सदा नमस्कार करता हूँ।*
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*जो इन्द्र आदि देवताओं, दक्ष, मारीच, सप्तर्षियों तथा दूसरों के भी नेता हैं, कामना की पूर्ति करने वाले उन पितरों को मैं प्रणाम करता हूँ।*
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*जो मनु आदि राजर्षियों, मुनिश्वरों तथा सूर्य और चन्द्रमा के भी नायक हैं, उन समस्त पितरों को मैं जल और समुद्र में भी नमस्कार करता हूँ।*
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*नक्षत्रों, ग्रहों, वायु, अग्नि, आकाश और द्युलोक तथा पृथ्वी के भी जो नेता हैं, उन पितरों को मैं हाथ जोड़कर प्रणाम करता हूँ।*
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*जो देवर्षियों के जन्मदाता, समस्त लोकों द्वारा वन्दित तथा सदा अक्षय फल के दाता हैं, उन पितरों को मैं हाथ जोड़कर प्रणाम करता हूँ।*
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*प्रजापति, कश्यप, सोम, वरूण तथा योगेश्वरों के रूप में स्थित पितरों को सदा हाथ जोड़कर प्रणाम करता हूँ।*
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*सातों लोकों में स्थित सात पितृगणों को नमस्कार है। मैं योगदृष्टिसम्पन्न स्वयम्भू ब्रह्माजी को प्रणाम करता हूँ।*

*चन्द्रमा के आधार पर प्रतिष्ठित तथा योगमूर्तिधारी पितृगणों को मैं प्रणाम करता हूँ। साथ ही सम्पूर्ण जगत् के पिता सोम को नमस्कार करता हूँ।*
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*अग्निस्वरूप अन्य पितरों को मैं प्रणाम करता हूँ, क्योंकि यह सम्पूर्ण जगत् अग्नि और सोममय है।*
*जो पितर तेज में स्थित हैं,*
*जो ये चन्द्रमा, सूर्य और अग्नि के रूप में दृष्टिगोचर होते हैं तथा जो जगत्स्वरूप एवं ब्रह्मस्वरूप हैं, उन सम्पूर्ण योगी पितरो को मैं एकाग्रचित्त होकर प्रणाम करता हूँ।*
*उन्हें बारम्बार नमस्कार है। वे स्वधाभोजी पितर मुझपर प्रसन्न हों।*

*विशेष - मार्कण्डेयपुराण में महात्मा रूचि द्वारा की गयी पितरों की यह स्तुति ‘पितृस्तोत्र’ कहलाता है। पितरों की प्रसन्नता की प्राप्ति के लिये इस स्तोत्र का पाठ किया जाता है। इस स्तोत्र की बड़ी महिमा है। श्राद्ध आदि के अवसरों पर ब्राह्मणों के भोजन के समय इसका पाठ करना या करवाना चाहिए ।*
*।।सबका मंगल हो ।।*
*श्राद्ध की तिथियाँ निम्नांकित हैं:*

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०६ सितम्बर (बुधवार) प्रतिपदा श्राद्ध
०७ सितम्बर (बृहस्पतिवार) द्वितीया श्राद्ध
०८ सितम्बर (शुक्रवार) तृतीया श्राद्ध
०९ सितम्बर (शनिवार) चतुर्थी श्राद्ध
१० सितम्बर (रविवार) महा भरणी, पञ्चमी श्राद्ध
११ सितम्बर (सोमवार) षष्ठी श्राद्ध
१२ सितम्बर (मंगलवार) सप्तमी श्राद्ध
१३ सितम्बर (बुधवार) अष्टमी श्राद्ध
१४ सितम्बर (बृहस्पतिवार) नवमी श्राद्ध अविधवा नवमी
१५ सितम्बर (शुक्रवार) दशमी श्राद्ध
१६ सितम्बर (शनिवार) एकादशी श्राद्ध
१७ सितम्बर (रविवार) द्वादशी श्राद्ध, त्रयोदशी श्राद्ध
१८ सितम्बर (सोमवार) मघा श्राद्ध, चतुर्दशी श्राद्ध शस्त्रो थी मरेला नुं श्राद्ध
१९ सितम्बर (मंगलवार)
सर्वपित्री अमावस्या या महालय अमावस्या, पूनमनुं श्राद्ध.
20सितम्बर बुधवार मातामहनुं श्राद्ध.
*21 सितम्बर घट स्थापन*
*शारदिय नवरात्रि आरंभ*
*हर हर महादेव🙏जय श्री महाकाल*🙋‍♂
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