शनिवार, 15 अगस्त 2015

--- राधा रानी की अष्ट सखियो के बारे मे---



  
--- राधा रानी की अष्ट सखियो के बारे मे---
-1. ललिता सखी - ये सखी सबसे चतुर और पिय सखी है। राधा रानी को तरह-तरह के खेल खिलाती है। कभी-कभी नौका-विहार, वन-विहार कराती है। ये सखी ठाकुर जी को हर समय बीडा(पान) देती रहती है। ये ऊँचे गाव मे रहती है। इनकी उम 14 साल 8 महीने 27 दिन है।
2. विशाखा सखी - ये गौरांगी रंग की है। ठाकुर जी को सुदंर-सुदंर चुटकुले सुनाकर हँसाती है। ये सखी सुगन्धित दव्यो से बने चन्दन का लेप करती है। इनकी उम 14 साल 2 महीने 15 दिन है।
3.चम्पकलता सखी - ये सखी ठाकुर जी को अत्यन्त पेम करती है। ये करहला गाव मे रहती है।इनका अंग वण पुष्प-छटा की तरह है।ये ठाकुर जी की रसोई सेवा करती है। इनकी उम 14 साल 2 महीने 13 दिन है।
4. चिता सखी - ये सखी राधा रानी की अति मन भावँती सखी है। ये बरसाने मे चिकसौली गाव मे रहती है। जब ठाकुर जी 4 बजे सोकर उठते है तब यह सखी फल, शबत, मेवा लेकर खड़ी रहती है। इनकी उम 14 साल 7 महीने 14 दिन है।
5. तुगंविधा सखी - ये सखी चदंन की लकड़ी के साथ कपूर हो ऐसे महकती है।ये युगलवर के दरबार मे नृत्य ,गायन करती है।ये वीणा बजाने मे चतुर है
ये गौरा माँ पार्वती का अवतार है। इनकी उम 14 साल 2 महीने 22 दिन है।
6. इन्दुलेखा सखी - ये सखी अत्यन्त सुझबुझ वाली है। ये सुनहरा गाव मे रहती है।ये किसी कि भी हस्तरेखा को देखकर बता सकती है कि उसका क्या भविष्य है। ये पेम कहानियाँ सुनाती है। इनकी उम 14 साल 2 महीने 10 दिन है।
7. रगंदेवी सखी - ये बड़ी कोमल व सुदंर है। ये राधा रानी के नैनो मे काजल लगाती है और शिंगार करती है।इनकी उम 14 साल 2 महीने 4 दिन की है।
8.सुदेवी सखी - ये सबसे छोटी सखी है। बड़ी चतुर और पिय सखी है। ये सुनहरा गाव मे रहती है। ये ठाकुर जी को पानी पिलाने की सेवा करती है।इनकी उम 14 साल 2 महीने 4 दिन की है।
जय श्री राधे राधे !!



                                  क्या माँगें ईश्वर से?
एक बार हकीम लुकमान से उसके बेटे ने पूछा- ‘‘अगर मालिक ने फरमाया कि कोई चीज मांग, तो मैं क्या मांगूं?’’
लुकमान ने कहा- ‘‘परमार्थ का धन।’’
बेटे ने फिर पूछा- ‘‘अगर मालिक और चीज मांगने को कहे तो?’’
लुकमान ने कहा- ‘‘पसीने की कमाई मांगना।’’
उसने फिर पूछा- ‘‘तीसरी चीज?’’
जवाब मिला- ‘‘उदारता।’’
‘‘चौथी चीज क्या मांगूं?’’
‘‘शर्म।’’
‘‘पांचवीं?’’
‘‘अच्छा स्वभाव।’’
बेटे ने फिर पूछा- ‘‘और कुछ मांगने को कहे तो?’’
लुकमान ने उत्तर दिया- ‘‘बेटा जिसे ये 5 चीजें मिल गईं उसे और मांगने के लिए कुछ भी नहीं बचेगा। खुशहाली का यही रास्ता है और तुझे भी इसी रास्ते से जाना चाहिए।’’

यही सत्य है, ईश्वर से वही चीज़ माँगी जानी चाहिये जो उस से माँगे जाने के लायक है। धन-सुख-साधन इत्यादि तो कमाए जाने की चीज़ें हैं माँगी जाने की नहीं॥

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