बुधवार, 5 अगस्त 2015

मृत्यु के पूर्वाभास से जुड़े निम्नलिखित संकेत



मृत्यु के पूर्वाभास से जुड़े निम्नलिखित संकेत व्यक्ति को अपना अंत समय नजदीक होने का आभास करवाते हैं।
जब किसी नशा, रोग, अत्यधिक चिंता, अत्यधिक कार्य से भीतर के सभी स्नायु, नाड़ियां आदि कमजोर हो जाते हैं। यह उसी तरह है कि हम किसी इमारत के सबसे नीचे की मंजिल को खोद दें। ऐसे व्यक्ति की आंखों के सामने बार-बार अंधेरा छा जाता है। उठते समय, बैठते समय या सफर करते समय अचानक आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है। यदि यह लक्षण दो-तीन सप्ताह तक बना रहे तो तुरंत ही योग, आयुर्वेद और ध्यान की शरण में जाना चाहिए या किसी अच्छे डॉक्टर से सलाह लें।

* माना यह भी जाता है कि इस अंधेरा छा जाने वाले रोग के कारण उस चांद में भी दरार जैसा नजर आता है। यह उस लगता है कि चांद दो टुकड़ों में है, जबकि ऐसा कुछ नहीं होता।
* आंखों की कमजोरी से संबंधित ही एक लक्षण यह भी है कि व्यक्ति को दर्पण में अपना चेहरा न दिखकर किसी और का चेहरा होने का भ्रम होने लगता है।
* जब कोई व्यक्ति चंद्र, सूर्य या आग से उत्पन्न होने वाली रोशनी को भी नहीं देख पाता है तो ऐसा इंसान भी कुछ माह और जीवित रहेगा, ऐसी संभावनाएं रहती हैं।
* जब कोई व्यक्ति पानी में, तेल में, दर्पण में अपनी परछाई न देख पाए या परछाई विकृत दिखाई देने लगे तो ऐसा इंसान मात्र छह माह का जीवन और जीता है।
* जिन लोगों की मृत्यु एक माह शेष रहती है वे अपनी छाया को भी स्वयं से अलग देखने लगते हैं। कुछ लोगों को तो अपनी छाया का सिर भी दिखाई नहीं देता है।
* आयुर्वेदानुसार मृत्यु से पहले मानव शरीर से अजीब-सी गंध आने लगती है। इसे मृत्यु गंध कहा जाता है। यह किसी रोगादि, हृदयाघात, मस्तिष्काघात आदि के कारण उत्पन्न होती है। यह गंध किसी मुर्दे की गंध की तरह ही होती है। बहुत समय तक किसी अंदरुनी रोग को टालते रहने का परिणाम यह होता है कि भीतर से शरीर लगभग मर चुका होता है।
इटली के वैज्ञानिकों के अनुसार मरते वक्त मानव शरीर से एक खास किस्म की बू निकलती है। इसे मौत की बू कहा जा सकता है। मगर मौत की इस बू का अहसास दूसरे लोगों को नहीं होता। इसे सूंघने वाली खास किस्म की कृत्रिम नाक यानी उपकरण को विकसित करने के लिए इटली के वैज्ञानिक प्रयासरत हैं। शरीर विज्ञानी गियोबन्नी क्रिस्टली का कहना है कि मौत की गंध का अस्तित्व तो निश्चित रूप से है। जब कोई व्यक्ति मरता है, तो उसका भावनात्मक शरीर कुछ क्षणों तक जीवित रहता है, जो खास तरह की गंध को उत्सर्जित करता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि कुछ जानवर, खासकर कुत्ते और बिल्लियां अपनी प्रबल घ्राण शक्ति के बल पर मौत की इस गंध को सूंघने में समर्थ होते हैं, लेकिन सामान्य मनुष्यों को इसका पता नहीं चल पाता। मृत्यु गंध का आभास होने पर ये जानवर अलग तरह की आवाज निकालते हैं। भारत यूं ही नहीं कुत्ते या बिल्ली का रोने को मौत से जोड़ता है।
श्वास लेने और छोड़ने की गति भी तय करती है मनुष्य का जीवन। प्राणायाम करते रहने से सभी तरह के रोगों से बचा जा सकता है।
*जिस व्यक्ति का श्वास अत्यंत लघु चल रहा हो तथा उसे कैसे भी शांति न मिल रही हो तो उसका बचना मुश्किल है। नासिका के स्वर अव्यवस्थित हो जाने का लक्षण अमूमन मृत्यु के 2-3 दिनों पूर्व प्रकट होता है।
*कहते हैं कि जो व्यक्ति की सिर्फ दाहिनी नासिका से ही एक दिन और रात निरंतर श्वास ले रहा है (सर्दी-जुकाम को छोड़कर) तो यह किसी गंभीर रोग के घर करने की सूचना है। यदि इस पर वह ध्यान नहीं देता है तो तीन वर्ष में उसकी मौत तय है।
*जिसकी दक्षिण श्वास लगातार दो-तीन दिन चलती रहे तो ऐसे व्यक्ति को संसार में एक वर्ष का मेहमान मानना चाहिए। यदि दोनों नासिका छिद्र 10 दिन तक निरंतर ऊर्ध्व श्वास के साथ चलते रहें तो मनुष्य तीन दिन तक ही जीवित रहता है। यदि श्वास वायु नासिका के दोनों छिद्रों को छोड़कर मुख से चलने लगे तो दो दिन के पहले ही उसकी मृत्यु जानना चाहिए।
*जिसके मल, मूत्र और वीर्य एवं छींक एकसाथ ही गिरते हैं उसकी आयु केवल एक वर्ष ही शेष है, ऐसा समझना चाहिए।
*जिसके वीर्य, नख और नेत्रों का कोना यह सब यदि नीले या काले रंग के हो जाएं तो मनुष्य का जीवन छह से एक वर्ष के बीच समाप्त हो जाता है।
*जब किसी व्यक्ति का शरीर अचानक पीला या सफेद पड़ जाए और ऊपर से कुछ लाल दिखाई देने लगे तो समझ लेना चाहिए कि उस इंसान की मृत्यु छह माह में होने वाली है।
*जो व्यक्ति अकस्मात ही नीले-पीले आदि रंगों को तथा कड़वे-खट्टे आदि रसों को विपरीत रूप में देखने-चखने का अनुभव करने लगता हैं वह छह माह में ही मौत के मुंह में समा जाएगा।
* जब किसी व्यक्ति का मुंह, जीभ, कान, आंखें, नाक स्तब्ध हो जाएं यानी पथरा जाए तो ऐसे माना जाता है कि ऐसे इंसान की मौत का समय भी लगभग छह माह बाद आने वाला है।
* जिस इंसान की जीभ अचानक से फूल जाए, दांतों से मवाद निकलने लगे और सेहत बहुत ज्यादा खराब होने लगे तो मान लीजिए कि उस व्यक्ति का जीवन मात्र छह माह शेष है।
* यदि रोगी के उदर पर सांवली, तांबे के रंग की, लाल, नीली, हल्दी के तरह की रेखाएं उभर जाएं तो रोगी का जीवन खतरे में है, ऐसा बताया गया है।
* यदि व्यक्ति अपने केश एवं रोम को पकड़कर खींचे और वे उखड़ जाएं तथा उसे वेदना न हो तो रोगी की आयु पूर्ण हो गई है, ऐसा मानना चाहिए।

* हाथ से कान बंद करने पर किसी भी प्रकार की आवाज सुनाई न दे और अचानक ही मोटा शरीर दुबला और दुबला शरीर मोटा हो जाए तो एक माह में मृत्यु हो जाती है। सामान्य तौर पर व्यक्ति जब आप अपने कान पर हाथ रखते हैं तो उन्हें कुछ आवाज सुनाई देती है लेकिन जिस व्यक्ति का अंत समय निकट होता है उसे किसी भी प्रकार की आवाजें सुनाई देनी बंद हो जाती हैं।
मौत के ठीक तीन-चार दिन पहले से ही व्यक्ति को हर समय ऐसा लगता है कि उसके आसपास कोई है। उसे अपने साथ किसी साए के रहने का आभास होता रहता है। यह भी हो सकता है कि यह भी हो सकता है कि व्यक्ति को अपने मृत पूर्वजों के साथ रहने का अहसास होता हो यह अहसास भी मौत की सूचना हैँ

मंगलवार, 4 अगस्त 2015

प्रेत कितने प्रकार के होते --

प्रेत कितने प्रकार के होते


डाकिनी - अति भयंकर , निर्दय , स्मशान में मुर्दे और बच्चे को खाती है
शाकिनी - अविवाहित लड़की जब मर जाती है तो वो शाकिनी बनती है
जखिन - बुद्दी ओरत बन के फिरती है उसके बल सफ़ेद और बंधे हुवे नहीं होते है जो कोई उसके साथ सम्बन्ध बनाता है वो उस इन्सान का कल्याण करती है इस लिए कोई कोई उसको '' बलवंत '' के नाम से भी जानता है जब ओरत गर्भवास्ता या रजस्वला में मरी हुई सौभाग्यवती स्त्री के भुत को जखीन कहा जाता है
लाल या लावसर - रजस्वला अवस्था में जिनकी मृत्यु हो जाती है उसको लाव कहते है ये विधवा का भुत होता है ये स्मशान में रहती है और यो पसु पंखी को हेरान करती है मुर्दा उसका भोजन है
सटवाई - सगर्भा ओरतो को परेसान करती है पैदा हुए बच्चो को पांचवे या छठे दिन मार देती है
हदल - स्वभाव में बोहोत ही ख़राब , दुष्ट ,सुन्दर रूप लेके इन्सान को फसाती है उनका शिकार ज्यादातर बच्चे होते है ,जिन ओरत को बच्चा होता है और वो दस दिन के अन्दर मर जाती है वो खिजदा के पेड़ ऊपर रहती है और रातको हरे रंग के कपडे पहन के शिकार करती है
ये स्त्री वर्ग के भुत है अब पुरुष वर्ग के भूतो के बारे में जानेगे
भुत + पिचास - ये ज्यादा इंसानों को परेसान नहीं करते जब इनकी इच्छा होती है तभी वो बहार आते है इनको अंडे ,तीखा और ज्वार की ठंडी रोटी पसंद है
खाविस - लमान, मुस्लमान या म्हार लोगो के भुत को खाविस कहा जाता है वो १५ से १७ फिट ऊँचे होते है अविवाहित पुरुस मरने के बाद खाविस बनते है ये गुस्सेल होते है लेकिन खुस होने पर इन्सान को जो चाहेये वो देता है ये सफ़ेद रंग में होते है उनके पैर उलटे हो ते है वो जिनका चाहे रूप ले सकते है
भ्रमभुत - रत को या दिन को एकदम वीराने में या पीपल के पेड़ निचे स्नान संध्या करते है किसीको परेसान नहीं करते अगर किसी ब्रह्मण का खून होता है तो वो ब्रह्मभुत बनता
बेताल - इसको भूतो का राजा माना जाता है इसको सिद्ध करने पर ही आता है वो किसी के सरीर से भुत निकालना हो या प्रेत ग्रस्त इन्सान को ठीक करना हो तो मदद करता है सभी भुत इसकी बातो को मानते है इनके मंदिर भी होते है ये मुर्दे में भी जान दाल सकते है वेताल के दो रूप है एक रूद्र और एक जो आग लगाता है ये नग्न रहते है ये उनकी निसानी है तमिलनाडु में वेताल को अथ्य्नार , दुर्ग में मलदेव , तेलंगन में पेंक्तासु भी कहते हे
जोड़ - मुसलमान , कोली , खारवा की आत्मा ओ को जोड़ कहा जाता है ये एक पेड़ पर एक पैर और दुसरे पेड़ पर दूसरा पैर रखकर खड़ा रहता है इसको गर्दन नहीं होती है जिस पैड पर ये रहते है उसके निचे से जाने पर इन्सान बीमार पद जाता है
गिरहा - पानी डूबकर या पानी के अन्दर जिनका खून होता है वो गिरहा बनते है वो पानी में ही रहते है रात को अकेले जा रहे इंसान को आवाज लगा कर बुलाता है रात को नाव लेके जा रहे नाविकों को आवाज दे कर बुलाता है और गहरे पानी में लेजाकर डूबा देता है वो ज्यादा शक्ति साली नहीं होते अगर कोई उनके सर का एक बाल तोड़ ले तो वो उसके गुलाम बन जाते है
मुंजा -ब्रहमचारी युवान ,रूपवान ब्रहामन या ब्रहमचारी की मृत्यु होती है तो वो मुंजा बनता है ये पीपल के पेड़ पर रहता है और आने जाने वालो को परेसान करता है उसके कमर पर घंटिया होती है उसको बजाकर वो सबको परेसान करता है
देवचार - विवाहित शुद्ध मृत्यु के बाद जिसका अग्निसंस्कार ठीक से नहीं किया जाता वो देवचार बनता है गाव के सभी भुत उसके आधीन रहते है मुर्गी या बकरी की बलि उसको पसंद है और ये पुरे गाव की रक्षा करता है
पितृ - ये भुत छोटे होते है और जुंड में रहते है तांत्रिक उनको बस रखते है और ये परेसान ज्यादा करते है
वीर - अतिसय सुरवीर ,शक्तिशाली सभी भूतो के मालिक होते है दिन रात गुमते है किसीका भी रूप ले सकते है डरते है किसके भी सरीर में जा सकते है आग पैदा कर सकते है दिया जला सकते है अमावस्या के दिन ये ज्यादा दिक्ते है इन्सान को पकड़ के उनके सरीर में जा कर उनकी इच्छा को मनवाते है इनको पहचानना बहुत ही कठिन है वो वायु रूप होते है इस लिए उनको पकड़ना यानि अपनी मृत्यु को बुलाना होता है
आशेव - नाक से बोलता है अतिभ्यंकर प्रकार का पिचास है
चुडेल -इस प्रकार के भुत के पैर उलटे होते हे
गोल बियावानी - हाथ में मसाल के साथ जंगलो में गुमता है
दरया - आकार में अति प्रचंड होते है उसके सर पर सिंग होते है उनके पंजे भी बोहोत बड़े होते है
हमजाद - इंसानों के साथ रह सकता है उनको वस् में किया जा सकता है ज्यादा परेसान नहीं करते
और भी इस प्रकार के बोहोत से भुत पिचासो का वर्णन है जिनको हम नाल्खाम्भा ,जिद , पिलर , डाकिनी , कुस्थामंदा , मंत्री , भूचर , खेचर , जलाई , जोगनी , गावती ,मधुपर्वानी , मस्ख्वानी , और नाधोबा कहते हे
                                     अगर मिलें ये संकेत तो आपके घर में भी हो सकता है भूत!
(1)जिस तरह भिन्न -भिन्न चीजों के अलग-अलग संकेत होते है, ठीक उसी तरह प्रेत आत्माओं के मौजूद होने के भी कई संकेत होते है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर इन संकेतों में से अगर आपको कोई भी संकेत का अहसास हो तो सावधान हो जाए। आइए जाने ये कौन से संकेत है जो आत्मा के वजूद की और इशारा करते है।
(2) अजीबोगरीब आवाजे सुनाई देना : अगर आपको अजीबोगरीब जैसे कि किसी के चलने की, खुरचने की़, पायल की़, दरवाजा खटकाने की, कुछ गिरने की आदि आवाज़ें सुनाई दे, तो ये संकेत गलत हैं।
(3) अचानक इत्र या परफ्यूम की खुशबू आना: घर में किसी ने भी इत्र, परफ्यूम या खूशबू जैसी कोई भी चीज नहीं लगाई हो और उसके बावजूद अचानक ऐसी ही खुशबू आये, तो हो सकता है कोई प्रेत आत्मा आपके पास से गुजरी हो।
(4) परछायीं का दिखना : आपको घर में कभी अजीब सी परछायीं दिखाई दे, तो पहले इसकी पुष्टि कर ले की ये किसकी है। अन्यथा सावधान रहने की जरूरत है।
(5) जब अचानक तेजी से बंद हो दरवाजा: घर में अगर कोई ऐसा कमरा है, जिसके दरवाजे को हलका सा पुश करने से वह तेजी से बंद हो जाता हो तो ये संकेत भी अच्छा नहीं है। हो सकता है वहां कोई अदृश्य शक्ति का वास हो।
(6) दीवारों पर खुर्चन या धब्बे : अगर घर की दीवार पर आपको खुर्चन या धब्बे दिखाई दें, तो ये भी गलत संकेत हो सकते हैं।
(7) कोई बिस्तर पर बैठा हो : अचानक से आपको कभी लगे कि आपके खाली बेड पर कोई बैठा या लेटा है। और अगले ही पल में वो गायब सा हो जाता है। तो हो जाए सावधान।
(8) अपने स्थान पर न मिलें चीजें : अगर आप चीजों को संभाल कर रखते हैं, लेकिन फिर भी वे चीजें अपने स्थान पर नहीं मिलती हैं। और ऐसा बार-बार हो रहा है, तो जरूर कोई गड़बड़ है।
(9) कोई पीछा कर रहा हो : अगर आपको बार- बार महूसस हो रहा हो कि कोई ना कोई आपका पीछा कर रहा है, तो सर्तक हो जाए। ये कोई प्रेत आत्मा हो सकती है।
(10) किसी चीज का अचानक गायब होना : कोई चीज अचानक गायब हो जाए और फिर से आंखों के सामने आ जाए। तो ऐसी चीजे संभाल कर रखें, क्योंकि हो सकता है ये चीजें किसी अदृश्य शक्ति की पसंदीदा हो गई हो।
(11) रोने और सिसकियों की आवाजें : अचानक किसी के रोने की या सिसकियां लेने की आवाज आये, लेकिन देखने पर आवाज वाली जगह कोई नहीं हो, तो सावधान हो जाए।
(12) जैसे किसी ने छुआ हो : अगर अचानक लगे कि आपको किसी ने छुआ है। तो कोई न कोई गड़बड़ है।
(13) घर में कुत्ता -बिल्ली का व्यवहार अजीब लगे: अगर घर में मौजूद जानवर जैसे कुत्ता या बिल्ली अचानक से अजीब सा व्यवहार करने लगे या फिर अजीब-अजीब आवाज़ें निकालें, तो कुछ गड़बड है।