रविवार, 10 सितंबर 2017

औरत दिल से कमजोर नहीं होती, वो तो बस 'माँ' होती है/



पूरी कहानी पढियेगा...

वो विधवा थी पर श्रृंगार ऐसा कर के रखती थी कि पूछो मत। बिंदी के सिवाय सब कुछ लगाती थी। पूरी कॉलोनी में उनके चर्चे थे। उनका एक बेटा भी था जो अभी नौंवी कक्षा में था । पति रेलवे में थे उनके गुजर जाने के बाद रेलवे ने उन्हें एक छोटी से नौकरी दे दी थी । उनके जलवे अलग ही थे । 1980 के दशक में बॉय कटिंग रखती थी । सभी कालोनी की आंटियां उन्हें 'परकटी' कहती थी । 'गोपाल' भी उस समय नया नया जवान हुआ था । अभी 16 साल का ही था । लेकिन घर बसाने के सपने देखने शुरू कर दिए थे । गोपाल का आधा दिन आईने के सामने गुजरता था और बाकि आधा परकटी आंटी की गली के चक्कर काटने में।

गोपाल का नव व्यस्क मस्तिष्क इस मामले में काम नहीं करता था कि समाज क्या कहेगा ? यदि उसके दिल की बात किसी को मालूम हो गई तो ? उसे किसी की परवाह नहीं थी । परकटी आंटी को दिन में एक बार देखना उसका जूनून था ।

उस दिन बारिश अच्छी हुई थी । गोपाल स्कूल से लौट रहा था । साइकिल पर ख्वाबो में गुम उसे पता ही नहीं लगा कि अगले मोड़ पर कीचड़ की वजह से कितनी फिसलन थी । अगले ही क्षण जैसे ही वह अगले मोड़ पर मुड़ा साइकिल फिसल गई और गोपाल नीचे । उसी वक्त सामने से आ रहे स्कूटर ने भी टक्कर मार दी । गोपाल का सर मानो खुल गया हो । खून का फव्वारा फूटा । गोपाल दर्द से ज्यादा इस घटना के झटके से स्तब्ध था । वह गुम सा हो गया । भीड़ में से कोई उसकी सहायता को आगे नहीं आ रहा था । खून लगातार बह रहा था । तभी एक जानी पहचानी आवाज गोपाल नाम पुकारती है । गोपाल की धुंधली हुई दृष्टि देखती है कि परकटी आंटी भीड़ को चीर पागलों की तरह दौड़ती हुई आ रही थी । परकटी आंटी ने गोपाल का सिर गोद में लेते ही उसका माथा जहाँ से खून बह रहा था उसे अपनी हथेली से दबा लिया । आंटी की रंगीन ड्रेस खून से लथपथ हो गई थी । आंटी चिल्ला रही थी "अरे कोई तो सहायता करो, यह मेरा बेटा है, कोई हॉस्पिटल ले चलो हमें ।"

गोपाल को अभी तक भी याद है । एक तिपहिया वाहन रुकता है । लोग उसमे उन दोनों को बैठाते हैं । आंटी ने अब भी उसका माथा पकड़ा हुआ था । उसे सीने से लगाया हुआ था । गोपाल को टांके लगा कर घर भेज दिया जाता है । परकटी आंटी ही उसे रिक्शा में घर लेकर जाती हैं । गोपाल अब ठीक है । लेकिन एक पहेली उसे समझ नहीं आई कि उसकी वासना कहाँ लुप्त हो गई । जब परकटी आंटी ने उसे सीने से लगाया तो उसे ऐसा क्यों लगा कि उसकी माँ ने उसे गोद में ले लिया हो । वात्सल्य की भावना कहाँ से आई । उसका दृष्टिकोण कैसे एकक्षण में बदल गया । क्यों वह अब मातृत्व के शुद्ध भाव से परकटी आंटी को देखता था ।
 
(2017) आज गोपाल एक रिटायर्ड अफसर है । समय बिताने के लिए कम्युनिटी पार्क में जाता है । वहां बैठा वो आज सुन्दर औरतों को पार्क में व्यायाम करते देख कर मुस्कुराता है । क्योंकि उसने एक बड़ी पहेली बचपन में हल कर ली थी । वो आज जानता है, मानता है, और कई लेख भी लिख चूका है कि महिलाओं का मूल भाव मातृत्व का है । वो चाहें कितनी भी अप्सरा सी दिखें दिल से हर महिला एक 'माँ' है । वह 'माँ' सिर्फ अपने बच्चे के लिए ही नहीं है । वो हर एक लाचार में अपनी औलाद को देखती है । दुनिया के हर छोटे मोटे दुःख को एक महिला दस गुणा महसूस करती है क्योंकि वह स्वतः ही कल्पना कर बैठती है कि अगर यह मेरे बेटे या बेटी के साथ हो जाता तो ? इस कल्पना मात्र से ही उसकी रूह सिहर उठती है । वो रो पड़ती है । और दुनिया को लगता है कि महिला कमजोर है । गोपाल मुस्कुराता है, मन ही मन कहता है कि "हे, विश्व के भ्रमित मर्दो ! औरत दिल से कमजोर नहीं होती, वो तो बस 'माँ' होती है/

शनिवार, 9 सितंबर 2017

१२ राशीओ के लिए तुला राशी के गुरु क्या प्रभाव

प्रिय दोस्तों देवगुरु का राशी परिवर्तन १२/०९/२०१७ को सुबह ६;५३;समय कन्या राशी त्याग कर तुला राशी में प्रवेश होने जा रहा हे तो १२ राशीओ के लिए तुला राशी के गुरु क्या प्रभाव रहेगा जानिए-
 मेष राशी
आपके लिये गुरु अति शुभ रहेंगे अविवाहित हे उम्र लायक तो शादी की शरनाई बजने वाली हे अगले १३ महीने में विवाह होने के योग बन रहे हे गुरु भाग्य स्थान के स्वामी होकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे धार्मिक और पूजा कार्यो में मन लग्गा रहेगा बड़े भाई बहेनो से सबंधो में मधुरता बनी रहेगी गुरुजनों से ज्ञान मिलेगा धार्मिक यात्रा प्रवास होंगे लाइफ पार्टनर या बिजनेस पार्टनर से लाभ रहेगा कोंई कोर्टमेटर चल रही हो तो समाधान आपके पक्ष में होगा विदेश जाने में रूकावट हो रही होतो वो भी बाधा दूर होगी इच्छा पूर्ण होगी दाम्पत्य जीवन में कोंई मन मुटाव हे तो मधुरता आयेगी नये मित्र नई पहेचान होगी कम महेनत लाभ ज्यादा रहेगा नैया बिजनेस भी कर सकोगे आपके संतान घुमने फिरने जा सकते हे साला साली ननंद भोजाई देवर भानजा भान्जी भतीजा भतीजी जेसे सबंधो में लाभ और मधुरता अच्छी नजर आयेगी आपके लिये देवगुरु श्रेष्ठ फल प्रदान करेंगे फिर भी अगर आप कुछ दान करना चाहे तो १३ महीनो में ७ गुरुवार भ्रामण जोड़े को भोजन करवाकर पिला कपडा दान कर सकते हे या गायमाता को ७ केला या नुगती के लडू खिलाने से देवगुरु प्रश्न होंगे
ॐ नमो नारायण
वृषभ राशी
दोस्तों आप के रोग और शत्रु भाव से गुरु भ्रमण करेंगे यहां गुरु का अच्छा फल नही मिलता फिर भी आप कोंई रोग से पीड़ित हे तो सुधार आयेगा अस्टमेष और लाभेश हो कर छठे भाव में विपरीत राजयोग का फल दे सकते हे आप को नोकरी की तलाश हे तो वो इच्छा पूरी हो जायेगी राज्य से भी लाभदाई फल रहेगा रोजगार में कुछ नया सोचेंगे जो लाभदाई होगा कर्ज हे तो धीरे धीरे उतरता नज़र आयेगा मोसाल मामा मोसी पक्ष से लाभ रहेगा पिता से अच्छा फल मिलेगा माता पिता को धार्मिक यात्रा हो सकती हे प्रोपर्टी को लेकर कोंई परेशानी उलजन हे वो सुलज जाएगी संतानों को भी धनलाभ मिलेंगे परदेश या परवतन जाना हे अब आप जा सकेंगे सरकारी नोकरी में बदली तबादला हो सकता हे, नये कार्यो से नई पहेचान से लाभफल रहेंगे फिर भी आप को ध्यान रखना हे हित शत्रुओ से कही आप के संग मीठी बाते करके आपका ही बुरा इच्छे ऐसे व्यक्तियो से सावधान रहे; डायाबीटीस गले की खराबी जेसे रोगों से बचे
गुरुवार के दिन अस्पताल में दर्दियो को फलफ्रूट बाटे,
केला,पपीता, मिस्ठान भोजन वर्धजनों या भ्रामण को दान करसकते हो
ॐ नमो नारायण
मिथुन राशी
१२/०९/२०१७ से ११/१०/२०१८ तक तुला राशी में गोचर भ्रमण रहेगा आप की राशी से पंचम भाव से गुरु भ्रमण करेगे जो आकस्मिक लाभ ही देंगे इनकम अच्छी रहेगी आपके संतानों की प्रगति होगी अगर आप संतानहिन हे संतान के इच्छुक हे तो जरुर ही इच्छापूर्ति होगी भाग्य आप का शाथ देगा विद्यार्थियो को पढाई में मन लगेगा इम्तिहान में अच्छे मार्क मिलेंगे अच्छे कार्यो में सफलता मिलेगी व्यपार में प्रगति होगी नये वेपार बिजनेस के लिये समय बहोत ही अच्छा रहेगा भाई बहेन से और लाइफ पार्टनर से लाभ रहेगा धार्मिक कार्य में रूचि बढ़ेगी धार्मिक यात्रा प्रवास के लिए भी समय अच्छा हे सबंधो की बात करे तो प्रेम,बड़ी भाभी,बड़े जीजाजी चाचासुसर जेसे सबंधो से मिठास रहेगी आप के संतान शादी शुदा हे तो आप नाना नानी या दादा दादी बन सकते हे संगीत साधनों से जुड़े हुवे जातको को अच्छा समय रहेगा कला और कल्पना शक्ति में बढ़ोतरी होगी टेक्सटाइल्स वेपार से जुड़े हुवे हे तो वेपार में बढ़ोतरी रहेगी कोंई बिजनेश में पार्टनरशिप हे अच्छा रहेगा सरकारी कर्मचारी हे तो प्रमोसन मिलने के चान्स रहेगे प्रेमी युगलों के लिए रूठे प्रेम को मनाने के अवसर रहेंगे.
संस्क्रत पाठशाला में जरुरत मंद भ्रामण विद्यार्थीओ को जरुरी पुस्तके दान कर सकते हो या गुरुवार के दिन ५ छोटी भ्रामण बालिकाओ को भोजन करवाके पिला कपड़ा या श्रींगार वस्तु भेट दे सकते हो
ॐ नमो नारायण

कर्क राशी
प्रिय दोस्तों १२/९/२०१७ से ११/१०/२०१८ तक गुरुका गोचर भ्रमण आपकी राशी से चतुर्थ भाव से होगा आपके लिये सुख समृधि की सोगात लेकर आयेंगे नया वाहन मकान या घरमे कुछ लक्जरी चीज़े खरीदने के अवसर मिलेंगे भोतिक सुख साधन बसा सकेंगे नया कारोबार बिजनेश के लिए समय शुभ रहेगा नोकरी में हे तो पदप्रतिष्ठा और उन्नति क्रम क्षेत्र में कार्यो की सिध्धि और श्रेष्ठ फल रहेगा नोकरी की तलाश हे तो वो अब समाप्त होगी और नोकरी मिल जायेगी कर्ज हे तो उतरता नज़र आयेगा राहत मिलेगी बीमारियों में खर्च हे तो अब लगाम लगेगी चेन की साँस लोगे
माताके आरोग्य का ध्यान रखना होगा पिता के लिये शुभ समय सामाजिक कार्यो से मानसन्मान मिलेंगा ,आप के घर भ्रामण, और पूज्यनीय महापुरुषो का आनाजाना रहेगा घरमे धार्मिक पूजा कार्य करवायंगे वतन से बहार जाने की इच्छा हे तो आप को अवसर मिलेंगे चोथे भाव में गुरु नया स्थान परिवर्तन करवा सकते हे जो किसी बड़े शहेर का या मकान. ऑफिस, नोकरी का हो सकता हे
नित्य माता पिता के चरणस्पर्स करे आशीर्वाद लें माता की सेवा करे
गुरुवार के दिन जरुरत मंद वर्ध भ्रामण स्त्री को चने की दाल या पीले वस्त्रदान करे घर में पूजा स्थान साफ रखें ॐ नमो नारायण
ॐ नमो नारायण
सिंह राशी
१२/९/२०१७ से गुरु आपकी राशी से तृतीय भाव से गोचर भ्रमन रहेगा शारीर में थोड़ी थकान महेसुस करेंगे अस्टमेस पंचमेस होकर गुरु साहस और पराक्रम भाव में होने से आप के संतान आप से दूर जा सकते हे अभ्यास या कामकाज को लेकर दूर जाना हो सकता हे ये साल आप को मुसाफ़री यात्रा ज्यादा होंगी भाई बहेनो से मन मुटाव हो सकता हे मधुरता बनाये रखे वाहन चलाने में सावधानी बरते नये रिस्ते नये दोस्त नई पहेचान होगी
जीवन में कुछ नया परवर्तन होगा व्यपार में लाभदाई फल मिलेंगे
अविवाहित हे तो विवाह हो सकता हे दाम्पत्य जीवन में मन मुटाव हे तो मधुरता आयेगी लाइफ पार्टनर के साथ घुमने फिरने या धार्मिक यात्रा प्रवास होगा वीदेस परदेस की इच्छापूर्ति होगी लेकिन प्रश्नल लाइफ में थोड़ी मुश्केली नजर आयेगी
दान हेतु. छोटी बहेन को या भ्रामन कन्या को पीले वस्त्र दान कर सकते हो
ॐ नमो नारायण
कन्या राशी
दोस्तों आपकी राशी से धन और परिवार भाव से गुरुका गोचर भ्रमण रहेगा परिवार में मधुरता बनी रहेगी लाइफ पार्टनर का अच्छा सयोग मिलेगा
कोंई कोर्टमेटर चल रही हो तो सफलता के योग हे नये कार्य होंगे परिवार में नये महेमान यानि सन्तान के योग बनेंगे अटके हुवे कार्य पूर्ण होंगे माता का शाथ रहेगा मकान जमींन से फायदा रहेगा धन कमाई में अच्छा समय रहेगा कमाये हुवे धन का उपयोग अपनी बुध्धि से करोगे कोंई व्यशन हे और छोड़ना चाहते हो तो व्यशन मुक्त हो सकते हो वाणी में मिठास रहेगी
इस साल बेंक बेलेन्स अच्छी कर सकोगे मकान या जमींन के लेनदेन में अच्छा लाभ रहेगा रोजिंदे कार्यो में मन लगेगा बिजनेस पार्टनर और
लाइफ पार्टनर , मामा मोसी सबंधो में लाभ रहेगा कोंई रोग या बीमारी हे तो राहत रहेगी. नोकरी व्यवसाय में अच्छा समय हे राज्यकिय कार्यो से अच्छा और शुभ फल पिता के लीयेभी अच्छा समय हे
ॐ नमो नारायण
तुला राशी
१२/९/२०१७/से आप की ही राशी में गुरुदेव भ्रमण करेंगे सहेत थोडा ध्यान रखना होगा फिर भी अच्छा ही फल मिलेगा अविवाहित हे तो विवाह होगा कोर्टमेटर चल रही हो तो विजय प्राप्ति मिलेगी लाइफ पार्टनर से अच्छा समय गुजरेगा बिजनेस में पार्टनर से गलतफेमि दूर होगी भाई बहेनो मित्रो से लाभदाई फल रहेगा रोजिदें कार्यो में मन लगा रहेगा संतान इच्छुक कपल की इच्छा पूर्ण होगी आप के संतानों के लिए अच्छे अवसर रहेंगे विद्यार्थियो के लिये बहोत अच्छा समय रहेगा पढाई में मन लगेगा ज्ञान की वृधि होगी भाग्य साथ देता नजर आयेगा कोंई भी पुरुसकार या आकस्मिक लाभालाभ मिल सकता हे अगर सुसराल में मनमुटाव हे तो सबंधो में मधुरता आयेगी, मंदिर, पूजास्थानों धार्मिक स्थानों में रूचि रहेगी अगले १३ महीने भाग्य उन्नति के लिए खुशनुमा समय रहेगा प्रेमपात्रो के लिये प्रेम विवाह में रूकावट या अडचने आ रही हो तो दूर होगी विवाह हो सकता हे
तुला राशी जातको के लिए अच्छा समय महेसुस करेंगे नित्य गुरु मंत्रो की १ माला जरुर करे शुक्रवार के दिन लक्ष्मीजी को खीर का या दूध से बनी मिठाई का भोग लगावें भ्रामण स्त्री को वस्त्र दान करे
ॐ नमो नारायण
वृश्चिक राशी
१२/९/२०१७ से गुरु आपकी राशी से १२वे खर्च भाव से गोचर रहेगा आपके लिए कुछ खर्च का समय रहेगा संतानों में खर्च परिवार में खर्च धार्मिक कार्यो में खर्च प्रेम के पीछे खर्च भोतिक सुख साधनों में खर्च हो सकते हे विद्द्यार्थियो को अभ्यास के लिये दूर जाना पड़ सकता हे महेनत करनी होगी तो भाग्य साथ देगा.विदेश परदेस से धनलाभ हो सकते हे धन कमाने हेतु आपके स्थान से दूर जाना पड़े मामा मोसी चाचा चाची जेसे सबंधो में लाभदाई रहोगे माता पिता के लिये कार्य हेतु या धार्मिक यात्राऐ मुशाफरी के अवसर आयेंगे. खानेपीने सावधानी बर्ते गला खराब हो सकता हे
सामाजिक कार्यो में मन लगेगा मान प्रतिष्ठा बढ़ेगी
दान हेतु . पीतल की कटोरी में चने की दाल भरकर थोडा गुड और हल्दी कसी भी मंदिर में या वर्धभ्रामण को ५ गुरुवार दान कर सकते हो पीपल या केले के वृक्ष पर हल्दी,केसर, चंदन मिश्रित जल अर्पित करे
ॐ ब्रं ब्रह्स्पते नमः मन्त्र ५ माला करे
ॐ नमो नारायण
धन राशी
१२/९/२०१७ से धन राशी वाले जातको के लिये गुरु लाभदाई जरुर रहेंगे
लाभ स्थान में गुरु का गोचर अति श्रेष्ठ फलदाता होगा सरकारी नोकरी में प्रमोशन के चान्स रहेंगे भाई बहेनो मित्र पड़ोसियों जेसे सबंधो में मधुरता आयेगी मित्र, माता से राज्य से लाभदाई रहेंगे मकान वाहन की इच्छा पूर्ति होगी,दाम्पत्य जीवन खुशहाल रहेगा संतानों की प्रगति र्होगी संतान इच्छुक हे तो संतान प्राप्ति के अच्छे अवसर रहेंगे देश परदेश की यात्रा प्रवास के मोके आयेगे और लाभदाई रहेंगे नये मित्र नई पहेचान बढ़ेगी शेरबाजार में पैसा रुका हुवा हे अब समय लाभप्रद रहेगा मित्रो को या भाई बहेन को गिफ्ट जरुर देंगे विद्यार्थियो के अभ्यास में बुहोत ही बढ़िया समय रहेगा संगीत साधनों से जुड़ेहुवे जातको के लिये सुनहरे दिन रहेंगे अविवाहितो के लिए विवाह होने के योग बनेगे कोर्टमेटर चल रही हो तो समाधान होंगे सामाजिक सेवा के लाभ मिलेंगे कोंई नये कार्यो की शरुआत कर सकेंगे १३ महीने दोहरान आकस्मिक लाभ मिलेगा
दान हेतु ११ गुरुवार हर गुरुवार को ११ केले गौमाता को खिलावें ११ माला गुरु मन्त्र की करे अपने गुरुजनों के और माता के चरण स्पर्स करे आशीर्वाद ले केसर का तिलक करे
ॐ नमो नारायण
मकर राशी
१२/९/२०१७ से गुरु आपकी राशी से दशम भाव से गोचर करेंगे
सरकारी नोकरी में प्रमोशन के चान्स रहेंगे स्थान परिवर्तन हो सकता हे और लाभप्रद रहेगा इंटरव्यू देने में भी समय का साथ मिलेगा नये काम रोजगार मिलेंगे मकान वाहन लेने के सपने साकार होंगे राजकीय कार्यकर्ताओ के लिये समय अच्छा रहेगा,कही धन पैसा रुका हुवा हे तो वो अब धीरे धीरे मिलता रहेगा घरमें नये फर्नीचर बसायेंगे धार्मिक कार्य मांगलिक कार्य होंगे
शत्रु भी मित्र बनते नज़र आयेगे परिवार से सुखद समय रहेगा माता पिता के लिये भी सुखद समय रहेगा आप को प्रोपर्टी में लाभप्रद समय रहेगा
शनि की साडेसाती २६/१०/२०१७ से रहेगी कुछ परेशानी हो सकती हे क़ानूनी प्रश्नों से दूर रहे
उपाय हेतु.. माता पिता की सेवा करे उनका आदर करे
गुरुवार के दिन वृधभ्रामण की सेवा करे भोजन करवायें पीले वस्त्र दान करे
सात्विक सन्त गुरुजनों के आशीर्वाद लें
ॐ नमो नारायण
कुम्भ राशि
१२/९/२०१७ से गुरु गोचर भ्रमण आपकी राशी से नवंम भाव भाग्य स्थान से रहेगा त्रिकोण स्थान में गुरु कुबेरका खजाना समान फल देते हे लक्ष्मीलाभ अच्छा रहेगा भाग्य साथ बहोत ही अच्छे फल मिलेंगे आप के पुरुषार्थ के चलते समाज, परिवार.व्यपार, में अच्छे अप्रिव्रतन आयेगे आमदनी बढ़ेगी गुरु लाभेश धनेस होकर भाग्य स्थान में समजो भाग्य के द्वार ही खुलगये लाइफपार्टनर को अच्छे कार्य मिलते रहेंगे कुछ नये बिजनेस खोलना चाहते हो तो समय अच्छा साथ देगा भाई बहेनो मित्रो और पड़ोसियों से सबंधो में मधुरता रहेगी संतानों की तर्कि होगी सन्तान इच्छुक हे तो संतान प्राप्ति के योग अच्छे हे शेर मार्किट पैसा रुका हुवा हे या किसी मित्र में अटके हुवा पैसा हे रीकवरी होगी समाज में
इज्तआबरू में बढ़ोतरी होगी दादा दादी. नाना नानी बनेनेके सपने साकार होंगे देवकर्यो में रूचि रहेगी यात्रा प्रवास मुसाफ़री होगी विद्यार्थियो के लिये अच्छा समय रहेगा संगीत साधनों से जुड़े जातको के लिये भी सुनहरा अवसर हे प्रेमी युगलों के लिये लव मेरेंज हो सकती हे खेल खिलाडियों के लिये यशप्राप्ति पुरुस्कार मिलने के अवसर होंगे
फिर भी गुरुदेव को और प्रश्न करने के लिये गुरुवार के दिन मंदिर में या भ्रमण पुजारी के घर जाकर बादाम,चने की दाल, फल, पीले वस्त्र इत्यादि दान कर सकते हे भ्रमण द्वारा घर में या मंदिर में सत्यनारायण कथा या लक्ष्मी नारायण पूजा करवाने से गुरुदेव अति प्रश्न होंगे
ॐ नमो नारायण
मीन राशी

१२/९/२०१७ से गुरु गोचर भ्रमण आपकी राशी से अष्टम से होगा मीन राशी के जातको के लिये थोडा निराशावादी फल रहेगा कर्म और लग्नेश होकर आयुष्य भाव से गुरु का अच्छाफल नही माना गया हे आपके या आपके पिता के आरोग्य को लेकर मेडिकल खर्च हो सकते हे पुराने शत्रु फिर से आपसे उलजने की कोसिस कर सकते हे प्रश्नल लाइफ में शान्त जीवन में समस्याओ का सामना करना पड़सकता हे वतन से वतन से बहार जाना पड़ सकता हे फिर भी भाई बहेनो से हेल्फ मिलेगी इशायुरंस में या विमा के पैसे रुके हुवे हे तो वो आकस्मिक लाभ मिल सकता हे गूढ़शास्त्रों में रूचि रहेगी गुप्त प्रेम सबंधो का या छुपी बातो का पर्दाफास हो सकता हे
विध्या क्षेत्र में थोड़ी परेशानी महेसुस होगी महेनत करनी होगी
उपाय गुरुवार चनेकी दाल पितालकी कटोरी में भरकर २१ बादाम सवा किलो आलू पीले पुष्प मंदिर में दान करे या बहेते जल में प्रवाहित करें महामृत्नजय मन्त्र की ११ माला जरुर करे वाहन चलाते समय ध्यान से चलाये खानपान में ध्यान रखे गलेकी या लीवर की खराबी हो सकती हे
ॐ नमो नारायण
विशेष जानकारी उपरोक्त राशीफल सभी राशियों के दिये हे जनरल हे पर जन्म ग्रहों की क्या स्थति हे उस पर भी ध्यान देना पड़ता हे जेसे की मिथुन कन्या वृषभ तुला लग्न में गुरु शत्रु बनते हे मकर लग्न में नीचस्थ होते हे १२वे भाव के स्वामी होकर अच्छा फल नही दे सकते महादशा अंतरदशाओ को भी देखा जाता हे. नक्षत्रों परभी गोर किया जाता हे
जन्म कुंडली में ३.६,८.१२,भावोमे गुरु का अशुभ फल मिलता हे उन भाव के स्वामी होकर जिस भाव में बिराजमान होते तो उस भाव का फल बिगड़ता हे जन्म ग्रहों से गोचर ग्रहों में फल में बदलाव आ जाता हे
जन्म के सूर्य ऊपर से गुरु का गोचर भाग्य का शाथ मिलता हे पदप्रतिष्ठा मिलाती हे बेकारी में कामकाज मिलने के योग बनते हे पिता और राज्य से लाभ होता हे आरोग्य में सुखकारी समय रहेता हे
जन्म चन्द्र पर से गुरुका गोचर मानसिक स्वस्थता अच्छी रहेती हे कोटुम्बिक सुख में व्रधि होती हे मानसिक शांति का अनुभव होता हे जन्म के मंगल पर से गुरु का गोचर साहस हिमंत प्रदान मिलती हे साहस में कामयाबी नये मकान योग बनते हे प्रेसर की तकलीफ में राहत मिलती हे जन्म के बुध पर से गुरु का गोचर अभ्यास में व्योपार में सुभ फल मिलता हे बेंक बेलेंस होती हे जन्म के गुरु पर से गोचर गुरु का फल अच्छा ही रहेता हे सन्तान इच्छा पूर्ति होती हे संतान वालो को संतानों की प्रगति होती हे जन्म के शुक्र पर से गुरु का गोचर विवाह योग बनता दाम्पत्य जीवन में मधुरता आती हे संगीत साधनों में मन लगता हे
जन्म के शनि पर से गोचर गुरु पदप्रतिस्ठा में बढ़ोतरी होती रुके हुवे कार्य पूर्ण होते हे राजकीय लाभ होते हे आगेवानी उंचपद मिलाता हे धार्मिक और अध्यात्मिकता में रूचि रहेती हे अच्छे गुरुजनों का संग होता हे
जन्म के राहू पर से गोचर के गुरु राहू का बिगड़ा फल हो तो राहू के गुण में सुधार यानि संतानों में सुधार अता हे पर कपटी शाधु संग हो जाता हे
जन्म के केतु पर से गोचर के गुरु अच्छा फल देते हे पुत्र जन्म की प्राप्ति भी हो सकती हे पुत्र हे तो सेवा भावि बनते नजर आते हे-----------------हर हर महादेव

शनिवार, 2 सितंबर 2017

योग और भोग



। योग और भोग ।।*********************



(एक ही घड़ी मुहूर्त में जन्म लेने पर भी सबके कर्म और भाग्य अलग अलग क्यों -एक प्रेरक कथा )
------------------------------------------------------------------------
एक बार एक राजा ने विद्वान ज्योतिषियों और ज्योतिष प्रेमियों की सभा सभा बुलाकर प्रश्न किया कि
"मेरी जन्म पत्रिका के अनुसार मेरा राजा बनने का योग था मैं राजा बना , किन्तु उसी घड़ी मुहूर्त में अनेक जातकों ने जन्म लिया होगा जो राजा नहीं बन सके क्यों ? इसका क्या कारण है ?
राजा के इस प्रश्न से सब निरुत्तर होगये ..क्या जबाब दें कि एक ही घड़ी मुहूर्त में जन्म लेने पर भी सबके भाग्य अलग अलग क्यों हैं ।
सब सोच में पड़गये । कि अचानक एक वृद्ध खड़े हुये और बोले महाराज की जय हो ! आपके प्रश्न का उत्तर भला कौन दे सकता है , आप यहाँ से कुछ दूर घने जंगल में यदि जाएँ तो वहां पर आपको एक महात्मा मिलेंगे उनसे आपको उत्तर मिल सकता है ।
राजा की जिज्ञासा बढ़ी और घोर जंगल में जाकर देखा कि एक महात्मा आग के ढेर के पास बैठ कर अंगार (गरमा गरम कोयला ) खाने में व्यस्त हैं , सहमे हुए राजा ने महात्मा से जैसे ही प्रश्न पूछा महात्मा ने क्रोधित होकर कहा "तेरे प्रश्न का उत्तर देने के लिए मेरे पास समय नहीं है मैं भूख से पीड़ित हूँ ।तेरे प्रश्न का उत्तर यहां से कुछ आगे पहाड़ियों के बीच एक और महात्मा हैं वे दे सकते हैं ।"
राजा की जिज्ञासा और बढ़ गयी, पुनः अंधकार और पहाड़ी मार्ग पार कर बड़ी कठिनाइयों से राजा दूसरे महात्मा के पास पहुंचा किन्तु यह क्या महात्मा को देखकर राजा हक्का बक्का रह गया ,दृश्य ही कुछ ऐसा था, वे महात्मा अपना ही माँस चिमटे से नोच नोच कर खा रहे थे ।
राजा को देखते ही महात्मा ने भी डांटते हुए कहा " मैं भूख से बेचैन हूँ मेरे पास इतना समय नहीं है , आगे जाओ पहाड़ियों के उस पार एक आदिवासी गाँव में एक बालक जन्म लेने वाला है ,जो कुछ ही देर तक जिन्दा रहेगा सूर्योदय से पूर्व वहाँ पहुँचो वह बालक तेरे प्रश्न का उत्तर का दे सकता है "
सुन कर राजा बड़ा बेचैन हुआ बड़ी अजब पहेली बन गया मेरा प्रश्न, उत्सुकता प्रबल थी कुछ भी हो यहाँ तक पहुँच चुका हूँ वहाँ भी जाकर देखता हूँ क्या होता है ।
राजा पुनः कठिन मार्ग पार कर किसी तरह प्रातः होने तक उस गाँव में पहुंचा, गाँव में पता किया और उस दंपति के घर पहुंचकर सारी बात कही और शीघ्रता से बच्चा लाने को कहा जैसे ही बच्चा हुआ दम्पत्ति ने नाल सहित बालक राजा के सम्मुख उपस्थित किया ।
राजा को देखते ही बालक ने हँसते हुए कहा राजन् ! मेरे पास भी समय नहीं है ,किन्तु अपना उत्तर सुनो लो -
तुम,मैं और दोनों महात्मा सात जन्म पहले चारों भाई व राजकुमार थे । एकबार शिकार खेलते खेलते हम जंगल में भटक गए। तीन दिन तक भूखे प्यासे भटकते रहे ।
अचानक हम चारों भाइयों को आटे की एक पोटली मिली जैसे तैसे हमने चार बाटी सेकीं और अपनी अपनी बाटी लेकर खाने बैठे ही थे कि भूख प्यास से तड़पते हुए एक महात्मा आ गये । अंगार खाने वाले भइया से उन्होंने कहा
"बेटा मैं दस दिन से भूखा हूँ अपनी बाटी में से मुझे भी कुछ दे दो , मुझ पर दया करो जिससे मेरा भी जीवन बच जाय, इस घोर जंगल से पार निकलने की मुझमें भी कुछ सामर्थ्य आ जायेगी "
इतना सुनते ही भइया गुस्से से भड़क उठे और बोले "तुम्हें दे दूंगा तो मैं क्या आग खाऊंगा ? चलो भागो यहां से .
वे महात्मा जी फिर मांस खाने वाले भइया के निकट आये उनसे भी अपनी बात कही किन्तु उन भइया ने भी महात्मा से गुस्से में आकर कहा कि "बड़ी मुश्किल से प्राप्त ये बाटी तुम्हें दे दूंगा तो मैं क्या अपना मांस नोचकर खाऊंगा ? "
भूख से लाचार वे महात्मा मेरे पास भी आये , मुझे भी बाटी मांगी... तथा दया करने को कहा किन्तु मैंने भी भूख में धैर्य खोकर कह दिया कि " चलो आगे बढ़ो मैं क्या भूखा मरुँ ...?"।
बालक बोला "अंतिम आशा लिये वो महात्मा हे राजन !आपके पास आये , आपसे भी दया की याचना की, सुनते ही आपने उनकी दशा पर दया करते हुये ख़ुशी से अपनी बाटी में से आधी बाटी आदर सहित उन महात्मा को दे दी ।,
बाटी पाकर महात्मा बड़े खुश हुए और जाते हुए बोले "तुम्हारा भविष्य तुम्हारे कर्म और व्यवहार से फलेगा "
बालक ने कहा "इस प्रकार हे राजन ! उस घटना के आधार पर हम अपना भोग, भोग रहे हैं ,धरती पर एक समय में अनेकों फूल खिलते हैं, किन्तु सबके फल रूप, गुण, आकार-प्रकार, स्वाद में भिन्न होते हैं " ..।
इतना कहकर वह बालक मर गया । राजा अपने महल में पहुंचा और माना कि ज्योतिष शास्त्र, कर्तव्य शास्त्र और व्यवहार शास्त्र है । एक ही मुहूर्त में अनेकों जातक जन्मते हैं किन्तु सब अपना किया, दिया, लिया ही पाते हैं । जैसा भोग भोगना होगा वैसे ही योग बनेंगे । जैसा योग होगा वैसा ही भोग भोगना पड़ेगा और कर्मऔर उपाय द्वारा योगो मेथोडा सा अन्तर कर सकते है

भगवान् श्री कृष्ण

👉👉 भगवान् श्री कृष्ण को अलग अलग स्थानों में अलग अलग नामो से जाना जाता है।
👉 उत्तर प्रदेश में कृष्ण या गोपाल गोविन्द इत्यादि नामो से जानते है।
👉 राजस्थान में श्रीनाथजी या ठाकुरजी के नाम से जानते है।
👉 महाराष्ट्र में बिट्ठल के नाम से भगवान् जाने जाते है।
👉 उड़ीसा में जगन्नाथ के नाम से जाने जाते है।
👉 बंगाल में गोपालजी के नाम से जाने जाते है।
👉 दक्षिण भारत में वेंकटेश या गोविंदा के नाम से जाने जाते है।
👉 गुजरात में द्वारिकाधीश के नाम से जाने जाते है।
👉 असम ,त्रिपुरा,नेपाल इत्यादि पूर्वोत्तर क्षेत्रो में कृष्ण नाम से ही पूजा होती है।
👉 मलेशिया, इंडोनेशिया, अमेरिका, इंग्लैंड, फ़्रांस इत्यादि देशो में कृष्ण नाम ही विख्यात है।
👉 गोविन्द या गोपाल में "गो" शब्द का अर्थ गाय एवं इन्द्रियों , दोनों से है। गो एक संस्कृत शब्द है और ऋग्वेद में गो का अर्थ होता है मनुष्य की इंद्रिया...जो इन्द्रियों का विजेता हो जिसके वश में इंद्रिया हो वही गोविंद है गोपाल है।
👉 श्री कृष्ण के पिता का नाम वसुदेव था इसलिए इन्हें आजीवन "वासुदेव" के नाम से जाना गया। श्री कृष्ण के दादा का नाम शूरसेन था..
👉 श्री कृष्ण का जन्म उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद के राजा कंस की जेल में हुआ था।
👉 श्री कृष्ण के भाई बलराम थे लेकिन उद्धव और अंगिरस उनके चचेरे भाई थे, अंगिरस ने बाद में तपस्या की थी और जैन धर्म के तीर्थंकर नेमिनाथ के नाम से विख्यात हुए थे।
👉 श्री कृष्ण ने 16000 राजकुमारियों को असम के राजा नरकासुर की कारागार से मुक्त कराया था और उन राजकुमारियों को आत्महत्या से रोकने के लिए मजबूरी में उनके सम्मान हेतु उनसे विवाह किया था। क्योंकि उस युग में हरण की हुयी स्त्री अछूत समझी जाती थी और समाज उन स्त्रियों को अपनाता नहीं था।।
👉 श्री कृष्ण की मूल पटरानी एक ही थी जिनका नाम रुक्मणी था जो महाराष्ट्र के विदर्भ राज्य के राजा रुक्मी की बहन थी।। रुक्मी शिशुपाल का मित्र था और श्री कृष्ण का शत्रु ।
👉 दुर्योधन श्री कृष्ण का समधी था और उसकी बेटी लक्ष्मणा का विवाह श्री कृष्ण के पुत्र साम्ब के साथ हुआ था।
👉 श्री कृष्ण के धनुष का नाम सारंग था। शंख का नाम पाञ्चजन्य था। चक्र का नाम सुदर्शन था। उनकी प्रेमिका का नाम राधारानी था जो बरसाना के सरपंच वृषभानु की बेटी थी। श्री कृष्ण राधारानी

अनंत चतुर्दशी मुहूर्त्त

🙏 ऊँ भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी को अनन्त चतुर्दशी के रुप में मनाई जाती है. इस दिन अनन्त भगवान की पूजा करते हैं और संकटों से रक्षा करने वाला अनन्तसूत्रबांधा जाता है.
अनंत चतुर्दशी मुहूर्त्त
भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी को अनन्त चतुर्दशी कहा जाता है. भाद्र शुक्ल चतुर्दशी को अनन्त व्रत किया जाता है. धर्म ग्रंथों के अनुसार यह तिथि सूर्योदय काल में तीन मुहूर्त्त अर्थात 6 घडी़ ग्रह करनी चाहिए यह मुख्य पक्ष होता है. शास्त्रानुसार यह तिथि पूर्वाहरण व्याएवं मध्याह्न व्यापिनी लेनी चाहिए और यह गौण पक्ष होता है. दोनों ही परिस्थितियों में भाद्र शुक्ल चतुर्दी अर्थात अनंत चौदश 5 सितम्बर 2017 को अनन्त व्रत, पूजन और सूत्र बंधन के लिए शास्त्र सम्मत उपयुक्त है. इसके अतिरिक्त यह तिथि सूर्योदय के बाद कम से कम दो मुहूर्त्त अर्थात चार घडी़ विद्यमान हो तो भी ग्रह कि जा सकती है.
अनंत चतुर्दशी कथा
अनंत चतुर्दशी के दिन अनन्त भगवान की पूजा करके संकटों से रक्षा करने वाला अनन्तसूत्रबांधा जाता है. मान्यता है कि जब पाण्डव सारा राज-पाट हारकर वनवास के दुख भोग रहे होते हैं, तब भगवान श्रीकृष्ण उन्हें अनन्त चतुर्दशी व्रत करने को कहते हैं. श्री कृष्ण के कथन अनुसार धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने भाइयों तथा द्रौपदी के साथ पूरे विधि-विधान से इस व्रत का पालन करते हैं तथा अनन्तसूत्रधारण किया जिसके फलस्वरुप पाण्डवों को अपने समस्त कष्टों से मुक्ति प्राप्त होती है.
अनंत चतुर्दशी पूजा विधि |
अनंत चतुर्दशी के पूजन में व्रतकर्ता को प्रात:स्नान करके व्रत का संकल्प करना चाहिए पूजा घर में कलश स्थापित करना चाहिए, कलश पर भगवान विष्णु का चित्र स्थापित करनी चाहिए इसके पश्चात धागा लें जिस पर चौदह गांठें लगाएं इस प्रकार अनन्तसूत्र(डोरा) तैयार हो जाने पर इसे प्रभु के समक्ष रखें इसके बाद भगवान विष्णु तथा अनंतसूत्र की षोडशोपचार-विधिसे पूजा करनी चाहिए तथा ॐ अनन्तायनम: मंत्र क जाप करना चाहिए. पूजा के पश्चात अनन्तसूत्र मंत्र पढकर स्त्री और पुरुष दोनों को अपने हाथों में अनंत सूत्र बांधना चाहिए और पूजा के बाद व्रत-कथा का श्रवन करें. अनंतसूत्र बांधने लेने के बाद ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए और दक्षिणा देना चाहिए एवं स्वयं सपरिवार प्रसाद ग्रहण करना चाहिए.
अनंत चतुर्दशी कथा इस प्रकार है सत्ययुग में सुमन्तुनाम के एक मुनि थे सुमन्तु मुनि ने अपनी कन्या का विवाह कौण्डिन्यमुनि से कर देते हैं. उनकी पत्नी शीला अनन्त-व्रत का पालन किया करती थी अत: विवाह उपरांत भी वह अनंत भगवान का पूजन करती है और अनन्तसूत्र बांधती हैं व्रत के प्रभाव से उनका घर धन-धान्य से पूर्ण हो जाता है सदैव सुख सम्पन्नता बनी रहती है. परंतु एक दिन कौण्डिन्य मुनि की दृष्टि अपनी पत्नी के हाथ में बंधे अनन्तसूत्रपर पडती है सूत्र देखकर उन्हें यह अनुकूल नहीं लगता और वह अपनी पत्नी से इसे अपने हाथ से उतार देने को कहते हैं.
शीला ने विनम्रतापूर्वक उन्हें कहती है कि यह अनंत भगवान का सूत्र है जिसके प्रभाव से उन्हें सुख और ऎश्वर्य की प्राप्ति हुई है परंतु अपने मद में चूर ऋषि उस धागे का अपमान करते हैं और उसे जला देते हैं. इस अपराध के परिणाम स्वरुप उनका सारा सुख समाप्त हो जाता है, दीन-हीन कौण्डिन्य ऋषि अपने अपराध का प्रायश्चित करने का निर्णय करते हैं और अनन्त भगवान से क्षमा याचना करते हैं. वह प्रायश्चित हेतु चौदह वर्ष तक निरंतर अनन्त-व्रत का पालन करते हैं, उनके श्रद्ध पूर्वक किए गए व्रत पालन द्वारा भगवान अनंत प्रसन्न हो उन्हें क्षमा कर देते हैं और ऋषि को पुन: ऎश्वर्य एवं सुख की प्राप्ती होती है.
🙏 अनंत भगवान कि जय , जय माता दी 🙏
🙏🌹🌹🌷🌷🌸🌸🌺🌺🌹