गुरुवार, 21 फ़रवरी 2019

जानें शरीर पर तिल का मतलब और उनके छुपे हुए रहस्य*



*जानें शरीर पर तिल का मतलब और उनके छुपे हुए रहस्य*
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार तिल और भाग्य दोनों साथ-साथ चलते हैं और ये दोनों व्यक्ति के स्वभाव, कर्म और उनके जीवन में होने वाली अच्छी और बुरी घटनाओं की ओर संकेत करते हैं। इसलिए शरीर के विभिन्न अंगों पर तिल का कोई न कोई अर्थ अवश्य होता है। तिल हमारे भविष्य के कई रहस्यों को उजागर करते हैं। शरीर पर कोई तिल छोटा तो कोई बड़ा होता है ये काले और लाल रंग के होते हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि तिल हमारे पुनर्जन्म के बारे में बताते हैं। हालांकि इनको लेकर लोगों के भिन्न-भिन्न मत हैं।

▪ *तिल और ज्योतिष का संबंध*
समुद्र शास्त्र वैदिक ज्योतिष की एक शाखा है जिसमें तिल के महत्व, शक्तियों और उनके प्रभावों के बारे में बताया गया है। इनका असर मनुष्य के व्यक्तित्व, स्वभाव और उनके भाग्योदय पर पड़ता है। हमारे शरीर में ये विभिन्न आकार और रंग रूप के होते हैं। समुद्र विज्ञान में शरीर के अलग-अलग हिस्सों में तिल के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव को बताया गया है। कहा जाता है कि शरीर पर तिल ग्रह की स्थिति और उनके प्रभावों को दर्शाता है।
*तिल का स्वरूप*
*आकार के अनुसार*
1. छोटा – कम प्रभावशाली
2. बड़ा – अति शुभ
3. लंबा – शुभ
*रूप के अनुसार*
1. त्रिकोणीय – मिश्रित परिणाम
2. टेढ़ा-मेढ़ा – शुभ परिणामकारी
3. गोल – शुभ
4. वर्गाकार – अंत तक अप्रत्याशित फल परंतु मुश्किलों को दूर करने वाला
*रंग के अनुसार*
▪यदि तिल लाल, हल्का भूरा, चंदन अथवा हरा पन्ना जैसे रंग का हो तो वह भाग्यशाली होता है।
▪काले रंग के तिल को अच्छा नहीं माना जाता है। इसका मतलब होता है कि जीवन में बाधाएं आएँगी।
*शरीर पर तिल और उनका मतलब*
❇ *माथे पर तिल*
▪यदि किसी व्यक्ति के माथे के बीच में तिल हो तो वह व्यक्ति शांत, बुद्धिमान, परिश्रमी और दिल का साफ होता है।
▪यदि किसी के माथे में दाहिनी ओर तिल हो तो वह व्यक्ति धनवान होता है।
▪यदि माथे में बायीं ओर तिल हो तो वह व्यक्ति स्वार्थी होता है।
❇ *भौंह पर तिल*
▪भौंह के बीच में तिल होने का मतलब होता है कि उस व्यक्ति के अंदर एक लीडर की विशेषता होगी। उसके जीवन में आर्थिक संपन्नता आएगी।
▪यदि भौंह पर बायीं ओर तिल हो तो व्यक्ति डरपोक होगा और बिज़नेस और नौकरी में उसे कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
▪वहीं भौंह पर दाहिनी ओर तिल है तो व्यक्ति को वैवाहिक जीवन में ख़ुशियाँ एवं संतान सुख प्राप्त होगा।
❇ *आँखों पर तिल*
▪यदि किसी की दाहिनी आँख पर तिल का निशान हो तो वह व्यक्ति ईमानदार, मेहनती और विश्वास करने योग्य होता है।
▪बायीं आँख पर तिल का होना व्यक्ति के अंहकार और आशावादी सोच को दर्शाता है।
❇ *नाक पर तिल*
▪ऐसा माना जाता है कि जिस व्यक्ति की नाक पर (ठीक बीच पर) तिल होता है तो वह क्रोधी और बिना सोचे-समझे निर्णय लेने वाला होता है।
▪यदि किसी की नाक की दाहिनी तरफ तिल हो तो वह व्यक्ति कम मेहनत के बल पर अधिक धन पाने में कामयाब होता है।
▪यदि नाक की बायीं ओर तिल हो तो व्यक्ति को सफलता पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
▪यदि नाक के नीचे तिल हो तो व्यक्ति कामुक और विपरीत लिंग को आकर्षित करने वाला होगा।
❇ *गाल पर तिल*
▪जिसके बायें गाल पर तिल हो तो वह व्यक्ति अल्पभाषी, अधिक गुस्से वाला और धन ख़र्च करने वाला होता है।
▪यदि किसी के दायें गाल पर तिल हो तो व्यक्ति का स्वभाव आक्रामक होता है। इसके अलावा वह तर्कवादी और धन कमाने में अग्रणी होता है।
❇ *कान पर तिल*

▪यदि किसी के कान पर तिल हो तो उसका जीवन भौतिक सुखों से युक्त होता है।
▪यदि कान के ठीक ऊपर तिल हो तो व्यक्ति बुद्धिमान होता है।
❇ *होंठ पर तिल*
▪यदि किसी व्यक्ति के होंठ पर तिल होता है तो उन्हें अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि उन्हें मोटापा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं।
▪यदि आपके नीचे वाले होंठ पर तिल है तो आप फूडी नेचर के होंगे। इसके अलावा नाटक में आपकी विशेष रुचि होगी।
❇ *जीभ पर तिल*
▪यदि किसी शख्स की जीभ पर तिल है तो उसे स्वास्थ्य, शिक्षा एवं स्पीच संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
▪यदि किसी व्यक्ति की जीभ की नोक पर तिल हो तो वह व्यक्ति बहुत कूटनीतिज्ञ होता है। वह परिस्थितियों को काबू करने में सक्षम होता है। वह व्यक्ति अधिक फूडी भी होता है।
❇ *ठोड़ी पर तिल*
▪यदि किसी की ठोड़ी के बीच पर तिल होता है तो उस व्यक्ति को यात्रा करना अच्छा लगता है। उसे नई-नई जगहों पर जाना पसंद होता है।
▪यदि किसी की ठोड़ी के दाहिने हिस्से में तिल हो तो वह व्यक्ति तर्कवादी और कूटनीतिक विचारों वाला होता है।
▪वहीं जिस व्यक्ति की ठोड़ी पर बायीं ओर तिल हो तो वह व्यक्ति ईमानदार और स्पष्टवादी होता है।
❇ *गर्दन पर तिल*
▪यदि किसी व्यक्ति की गर्दन पर ठीक सामने तिल हो तो वह भाग्यशाली और कला से निपुण होता है।
▪वहीं गर्दन के पीछे वाले भाग पर तिल का होना व्यक्ति के क्रोधी को स्वभाव को दर्शाता है।
❇ *कंधे पर तिल*
▪यदि किसी व्यक्ति के बायें कंधे पर तिल का निशान हो तो वह व्यक्ति ज़िद्दी स्वभाव का होता है।
▪यदि किसी व्यक्ति के दायें कंधे पर तिल का निशान हो तो वह साहसी और बुद्धिमान होता है।
❇ *भुजा पर तिल*
▪यदि किसी व्यक्ति की दाहिनी भुजा में तिल हो तो वह बुद्धिमान और चालाक होता है।
▪बायीं भुजा में तिल का होना व्यक्ति की भौतिक सुखों की कामना को दर्शाता है लेकिन वास्तव में वह सामान्य जीवन जीता है।
❇ *कोहनी पर तिल*
यदि किसी व्यक्ति की कोहनी पर तिल हो तो उसका मतलब होता है कि वह व्यक्ति बेचैन, कला में निपुण, धनी और ट्रैवल लवर होगा।
❇ *कलाई पर तिल*
यदि किसी व्यक्ति की कलाई पर तिल होता है तो वह व्यक्ति कलात्मक होता है। उसके मन में नए-नए विचार आते हैं। ऐसे लोग अच्छे पेंटर और लेखक होते हैं।
❇ *हथेली पर तिल*
यदि किसी की हथेली पर तिल का निशान हो तो उस व्यक्ति को कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
❇ *उंगली पर तिल*
ऐसा कहा जाता है कि जिसकी उंगलियों पर तिल का निशान होता है। वह व्यक्ति विश्वासपात्र नहीं होता है। उसे चीज़ों को बढ़ा चढाकर कहने की आदत होती है।
❇ *पसलियों पर तिल*
▪दाहिनी पसली पर तिल का निशान यह बताता है कि व्यक्ति झूठ बोलने में माहिर और कई चीज़ों से भयभीत होता है।
▪वहीं बायीं पसली पर तिल व्यक्ति के सामान्य जीवन को दर्शाता है।
❇ *पीठ पर तिल*
▪पीठ पर रीढ़ की हड्डी के आसपास का तिल का होना सक्सेस, फेम और लीडरशिप को बताता है।
▪यदि किसी व्यक्ति के शोल्डर ब्लेड्स के नीचे तिल हो तो उस व्यक्ति को जीवन में संघर्ष करना पड़ेगा।
▪यदि किसी व्यक्ति के शोल्डर ब्लेड्स के ऊपर तिल का निशान हो तो वह व्यक्ति साहस के साथ चुनौतियों का सामना करता है।
❇ *सीने पर तिल*

▪जिस व्यक्ति के सीने पर तिल का निशान होता है उसकी कामुक प्रवृत्ति तीक्ष्ण होती है।
▪जिन महिलाओं के दाहिने सीने में तिल का निशान होता है तो उनके अंदर ड्रग्स और शराब के अलावा अन्य प्रकार का नशा करने की प्रवृत्ति पायी जाती है। वहीं यदि पुरुष के सीने में दाहिनी ओर तिल हो तो उसे आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
▪जिन पुरुषों के सीने में बायीं ओर तिल का निशान होता है तो वे चतुर स्वभाव के होते हैं लेकिन दोस्तों और रिश्तेदारों से उनके संबंध अच्छे नहीं रहते हैं। वहीं महिलाओं के बायें सीने में तिल हो तो वे शांत स्वभाव की होती हैं और परिवार, रिश्तेदारों और सहकर्मियों से उनके अच्छे संबंध होते हैं।
❇ *नाभि पर तिल*
▪जिन महिलाओं की नाभि में अथवा इसके अासपास तिल का निशान होता है तो ऐसी महिलाओं का वैवाहिक जीवन सुखी होता है।
▪किसी पुरुष के नाभि पर बायीं ओर तिल का निशान उसके समृद्ध जीवन को दर्शाता है। उसकी संतान को भी प्रसिद्धि मिलती है।
❇ *पेट पर तिल*
▪पेट पर तिल का निशान किसी व्यक्ति को हमेशा जोशीला बनाए रखता है।
▪अगर किसी पुरुष के उदर पर दाहिनी ओर तिल हो वह उसके मजबूत आर्थिक पृष्ठभूमि को दिखाता है। वहीं महिलाओं के लिए यह कमज़ोरी को दर्शाता है।
यदि पेट पर दाहिनी ओर तिल हो तो आमदनी की सुगमता को दर्शाता है।
❇ *नितंब पर तिल*
▪जिन लोगों के दोनों नितंब पर तिल हो तो ऐसे व्यक्ति ख़ुशमिजाज़, प्रिय और विश्वास योग्य होते हैं।
▪जिनके दायीं नितंब पर तिल हो तो ऐसे व्यक्ति क्रिएटिव और बुद्धिमान होते हैं।
▪जिन लोगों के बायें नितंब पर तिल होता है तो ऐसे लोग सामान्य आमदनी के बावजूद अपने जीवन से संतुष्ट दिखाई देते हैं।
❇ *गुप्तांग पर तिल*
जिन लोगों के गुप्तांग पर तिल का निशान होता है ऐसे लोग खुले विचार वाले और ईमानदार होते हैं। इसके अलावा ऐसे लोग अधिक रोमांटिक होते हैं और उनका वैवाहिक जीवन सुखी रहता है। भौतिक सुखों के अभाव के बावजूद भी ये लोग संतुष्ट रहते हैं।
❇ *जांघ पर तिल*
▪जिन लोगों की दायीं जंघा पर दिल का निशान हो तो ऐसे लोग मध्यम स्वभावी और निडर होते हैं।
▪बायीं जांघ पर तिल का निशान किसी व्यक्ति की कलात्मक क्षमता को दर्शाता है लेकिन ऐसे व्यक्ति आलसी और अधिक सामाजिक नहीं होते हैं।
❇ *घुटने पर तिल*
▪यदि किसी व्यक्ति के बायें घुटने पर तिल का निशान हो तो ऐसे व्यक्ति साहसी और रिस्क लेने वाले होते हैं। ऐसे लोग एक राजा की तरह अपना जीवन व्यतीत करते हैं।
▪जिन लोगों के दायें घुटने पर तिल होता है ऐसे लोगों का प्रेमजीवन कामयाब होता है। ऐसे लोग सभी से मित्र जैसा व्यवहार करते हैं।
❇ *पिण्डली पर तिल*

▪दायीं पिंडली पर तिल का होना अच्छा माना जाता है। ऐसे लोग कामयाब और समृद्धिशाली होते हैं। ऐसे व्यक्ति राजनीति में अधिक सक्रिय होते हैं और महिलाओं के द्वारा इन्हें अधिक सहयोग प्राप्त होता है।
▪बायीं पिण्डली पर तिल वाले व्यक्ति मेहनती होते हैं। उन्हें काम के सिलसिले में यात्रा करनी पड़ती है और उनके मित्रों की संख्या अधिक होती है।
❇ *टाँग पर तिल*
जिन लोगों के टांग पर तिल होता है ऐसे व्यक्ति बिना सोचे समझें कार्य करते हैं। वे परिणाम की चिंता नहीं करते हैं। इसलिए ऐसे लोग अक्सर कंट्रोवर्सी में घिरे रहते हैं।
❇ *टखने पर तिल*
यदि किसी के दायें टखने पर तिल होता है तो ऐसे व्यक्ति संभावित अनुमान लगाने वाले और अधिक बातूनी होते हैं। जबकि बायें टखने पर तिल के निशान वाले लोग अधिक धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं।
❇ *पैर पर तिल*
▪यदि किसी व्यक्ति के दायें पाँव पर तिल का निशान हो तो ऐसे लोगों को अच्छा जीवनसाथी प्राप्त होता है और उनका पारिवारिक जीवन संतोषजनक रहता है।
▪अगर बायें पैर पर तिल हो तो व्यक्ति को आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है और जीवनसाथी से भी उसके मतभेद रहते हैं।
▪यदि तलवे पर तिल हो तो स्वास्थ्य संबंधी परेशानी, दुश्मनों से चुनौती आदि का सामना करना पड़ता है।
❇ *पैर की उंगलियों पर तिल*
यदि किसी के पैर की उंगलियों पर तिल हो तो ऐसे व्यक्तियों का वैवाहिक जीवन सुखी नहीं होता है।
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चाण्डाल योग या दोष -*


.चाण्डाल योग या दोष -*
*बृहस्पति और राहु जब साथ होते हैं या फिर एक दूसरे को किन्ही भी भावो में बैठ कर देखते हो,
तो गुरू चाण्डाल योग निर्माण होता है। चाण्डाल का अर्थ निम्नतर जाति है। कहा गया कि चाण्डाल
की छाया भी ब्राह्मण को या गुरू को अशुद्ध कर देती है। गुरु चंडाल योग को संगति के उदाहरण से
आसानी से समझ सकते हैं। जिस प्रकार कुसंगति के प्रभाव से श्रेष्ठता या सद्गुण भी दुष्प्रभावित हो जाते
हैं। ठीक उसी प्रकार शुभ फल कारक गुरु ग्रह भी राहु जैसे नीच ग्रह के प्रभाव से अपने सद्गुण खो देते है। जिस प्रकार हींग की तीव्र गंध केसर की सुगंध को भी ढक लेती है और स्वयं ही हावी हो जाती है,
उसी प्रकार राहु अपनी प्रबल नकारात्मकता के तीव्र प्रभाव में गुरु की सौम्य, सकारात्मकता को भी निष्क्रीय कर देता है। राहु चांडाल जाति, स्वभाव में नकारात्मक तामसिक गुणों का ग्रह है, इसलिए इस योग को गुरु चांडाल योग कहा जाता है। जिस जातक की कुंडली में गुरु चांडाल योग यानि कि गुरु-राहु की युति हो वह व्यक्ति क्रूर, धूर्त, मक्कार, दरिद्र और कुचेष्टाओं वाला होता है। ऐसा व्यक्ति षडयंत्र करने वाला, ईष्र्या-द्वेष, छल-कपट आदि दुर्भावना रखने वाला एवं कामुक प्रवत्ति का होता है, उसकी अपने परिवार जनो से भी नही बन पाती तथा वह खुद को अकेला महसूस करने लग जाता है और उसका मन हमेशा व्याकुल रहता है।
उपाय – गुरु चांडाल योग के जातक के जीवन पर जो भी दुष्प्रभाव पड़ रहा हो उसे नियंत्रित करने के लिए
जातक को भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए। एक अच्छा ज्योतिषी कुण्डली देख कर यह बता सकता है कि हमे गुरु को शांत करना उचित रहेगा या राहु के उपाय जातक से करवाने पड़ेंगे। अगर चाण्डाल दोष गुरु या गुरु के मित्र की राशि या गुरु की उच्च राशि में बने तो उस स्थिति में हमे राहु देवता के उपाय करके उनको ही शांत करना पड़ेगा ताकि गुरु हमे अच्छे प्रभाव दे सके। राहु देवता की शांति के लिए मंत्र-जाप पुरे होने के बाद हवन करवाना चाहिए तत्पश्चात दान इत्यादि करने का विधान बताया गया है.
अगर ये दोष गुरु की शत्रु राशि में बन रहा हो तो हमे गुरु और राहु देवता दोनों के उपाय करने चाहिए गुरु-राहु से संबंधित*मंत्र-जाप, पूजा, हवन तथा दोनों से सम्बंधित वस्तुओं का दान करना चाहिए।*

करोड़पति योग

आपकी कुंडली के ये 10 योग बना सकते है आपको करोड़पति
किसके भाग्य में कब और कहाँ से धन का भण्डार खुलेगा। आइये जानते है जातक की कुंडली के कुछ योग जो जातक के धनोदय की और संकेत करते है:
गुरु जब दसवें या ग्यारहवें भाव में और सूर्य और मंगल चौथे और पांचवें भाव में हो या ग्रह इसकी विपरीत स्थिति में हो तो व्यक्ति प्रशासनिक क्षमताओं के द्वारा धन अर्जित करता है।
बुध, शुक्र और शनि जिस भाव में एक साथ हो वह व्यक्ति को व्यापार में बहुत उन्नति कर धनवान बना देता है।
गुरु जब कर्क, धनु या मीन राशि का और पांचवें भाव का स्वामी दसवें भाव में हो तो व्यक्ति पुत्र और पुत्रियों के द्वारा अपार धन लाभ पाता है।
मंगल चौथे, सूर्य पांचवें और गुरु ग्यारहवें या पांचवें भाव में होने पर व्यक्ति को पैतृक संपत्ति से, कृषि या भवन से आय प्राप्त होती है, जो निरंतर बढ़ती जाती है। इसे करोड़पति योग कहते हैं।


बुध, शुक्र और गुरु किसी भी ग्रह में एक साथ हो तब व्यक्ति धार्मिक कार्यों द्वारा धनवान होता है। जिनमें पुरोहित, पंडित, ज्योतिष, कथाकार और धर्म संस्था का प्रमुख बनकर धनवान हो जाता है।
दसवें भाव का स्वामी वृषभ राशि या तुला राशि में और शुक्र या सातवें भाव का स्वामी दसवें भाव में हो तो व्यक्ति विवाह के द्वारा और पत्नी की कमाई से बहुत धन पाता है।
कुंडली के त्रिकोण घरों या केन्द्र में यदि गुरु, शुक्र, चंद्र और बुध बैठे हो या फिर 3, 6 और ग्यारहवें भाव में सूर्य, राहु, शनि, मंगल आदि ग्रह बैठे हो तब व्यक्ति राहु या शनि या शुक्र या बुध की दशा में असीम धन प्राप्त करता है।
शनि जब तुला, मकर या कुंभ राशि में होता है, तब अकाउंटेंट बनकर धन अर्जित करता है।
यदि सातवें भाव में मंगल या शनि बैठे हों और ग्यारहवें भाव में शनि या मंगल या राहु बैठा हो तो व्यक्ति खेल, जुआ, दलाली या वकालात आदि के द्वारा धन पाता है।
यदि सातवें भाव में मंगल या शनि बैठे हो और ग्यारहवें भाव में केतु को छोड़कर अन्य कोई ग्रह बैठा हो, तब व्यक्ति व्यापार-व्यवसाय के द्वारा अतुलनीय धन प्राप्त करता है। यदि केतु ग्यारहवें भाव में बैठा हो तब व्यक्ति विदेशी व्यापार से धन प्राप्त करता है।

बुधवार, 26 सितंबर 2018

*ब्राह्मणों ने समाज को तोड़ा नही अपितु जोडा.

सकारात्मक सोच


 मै ब्राम्हणों का बहुत सम्मान करता हूँ इसलिए इस पोस्ट को शेयर करने से अपने आप को रोक नहीं पाया।
*ब्राह्मणों ने समाज को तोड़ा नही अपितु जोडा है।*
🤷‍♂🤝ब्राम्हणों ने विवाह के समय समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े *दलित* को जोड़ते हुये अनिवार्य किया कि *दलित* स्त्री द्वारा बनाये गये चुल्हे पर ही सभी शुभाशुभ कार्य होगें। इस तरह सबसे पहले *दलित* को जोडा गया ।
🤷‍♂🤝 *धोबी* के द्वारा दिये गये जल से ही कन्या सुहागन रहेगी इस तरह धोबी को जोड़ा।
🤷‍♂🤝 *कुम्हार* द्वारा दिये गये मिट्टी के कलश पर ही देवताओ के पुजन होगें यह कहते हुये कुम्हार को जोडा।
🤷‍♂🤝 *मुसहर जाति* जो वृक्ष के पत्तों से पत्तल/दोनिया बनाते है यह कहते हुये जोड़ा कि इन्हीं के बनाए गये पत्तल/दोनीयों से देवताओं का पूजन सम्पन्न होंगे।

🤷‍♂🤝 *कहार* जो जल भरते थे यह कहते हुए जोड़ा कि इन्हीं के द्वारा दिये गये जल से देवताओं के पुजन होगें।
🤷‍♂🤝 *बिश्वकर्मा* जो लकड़ी के कार्य करते थे यह कहते हुये जोड़ा कि इनके द्वारा बनाये गये आसन/चौकी पर ही बैठकर वर-वधू देवताओं का पुजन करेंगे।
🤷‍♂🤝 फिर वह *हिन्दु* जो किन्हीं कारणों से *मुसलमान* बन गये थे उन्हें जोड़ते हुये कहा गया कि इनके द्वारा सिले हुये वस्त्रों (जामे-जोड़े) को ही पहनकर विवाह सम्पन्न होगें।
🤷‍♂🤝फिर उस *हिन्दु से मुस्लिम बनीं औरतों* को यह कहते हुये जोड़ा गया कि इनके द्वारा पहनाई गयी चूडियां ही बधू को सौभाग्यवती बनायेगी।
🤷‍♂🤝 *धारीकार* जो डाल और मौरी को दुल्हे के सर पर रख कर द्वारचार कराया जाता है,को यह कहते हुये जोड़ा गया कि इनके द्वारा बनाये गये उपहारों के बिना देवताओं का आशीर्वाद नहीं मिल सकता।
🤷‍♂🤝 *डोम* जो गंदगी साफ और मैला ढोने का काम किया करते थे उन्हें यह कहकर जोड़ा गया कि *मरणोंपरांत* इनके द्वारा ही प्रथम मुखाग्नि दिया जायेगा....
👉इस तरह समाज के सभी वर्ग जब आते थे तो घर कि महिलायें मंगल गीत का गायन करते हुये उनका स्वागत करती है।

और पुरस्कार सहित दक्षिणा देकर विदा करती थी...,
*ब्राह्मणों का दोष कहाँ है*?...हाँ *ब्राह्मणों* का दोष है कि इन्होंने अपने ऊपर लगाये गये निराधार आरोपों का कभी *खंडन* नहीं किया, जो *ब्राह्मणों* के अपमान का कारण बन गया। इस तरह जब समाज के हर वर्ग की उपस्थिति हो जाने के बाद ब्राह्मण *नाई* से पुछता था कि क्या सभी वर्गो कि उपस्थिति हो गयी है...?
🤙 *नाई* के हाँ कहने के बाद ही *ब्राह्मण* मंगल-पाठ प्रारम्भ किया करते हैं।
*ब्राह्मणों* द्वारा जोड़ने कि क्रिया को छोड़वाया कुछ *ब्राह्मण विरोधी* लोगों ने और दोष ब्राह्मणों पर लगा दिया।
🙏 *ब्राह्मणों* को यदि अपना खोया हुआ वह सम्मान प्राप्त करना है तो इन बेकार वक्ताओं के वक्तव्यों का कड़ा विरोध कर रोक लगानी होगी।......
देश में फैले हुये समाज विरोधी *साधुओं* और *ब्राह्मण विरोधी* ताकतों का विरोध करना होगा जो अपनी अज्ञानता को छिपाने के लिये *वेद और ब्राह्मण* कि निन्दा करतेे हुये पूर्ण भौतिकता का आनन्द ले रहे हैं।......
💪याद रखो *ब्राह्मण* वो पण्डे नहीं जो मंदिर को दुकान बनाते हैं, ये ज्ञान के भण्डार हैं जिनसे इस श्रृष्टि की रचना हुई।.....

इस पोस्ट का मेरे *ब्राह्मण* होने से नही मनुवादी बिचारधारा क्या है बताना है।

शुक्रवार, 14 सितंबर 2018

॥ एकाक्षरगणपतिकवचम् ॥*


॥ एकाक्षरगणपतिकवचम् ॥*
🌹 *श्रीगणेशाय नमः* 🌹
नमस्तस्मै गणेशाय सर्वविघ्नविनाशिने ।
कार्यारम्भेषु सर्वेषु पूजितो यः सुरैरपि ॥ १॥ *पार्वत्युवाच*
भगवन् देवदेवेश लोकानुग्रहकारकः ।
इदानी श्रोतृमिच्छामि कवचं यत्प्रकाशितम् ॥ २॥
एकाक्षरस्य मन्त्रस्य त्वया प्रीतेन चेतसा ।
वदैतद्विधिवद्देव यदि ते वल्लभास्म्यहम् ॥ ३॥
*ईश्वर उवाच*
श्रृणु देवि प्रवक्ष्यामि नाख्येयमपि ते ध्रुवम् ।
एकाक्षरस्य मन्त्रस्य कवचं सर्वकामदम् ॥ ४॥
यस्य स्मरणमात्रेण न विघ्नाः प्रभवन्ति हि ।
त्रिकालमेककालं वा ये पठन्ति सदा नराः ॥ ५॥
तेषां क्वापि भयं नास्ति सङ्ग्रामे सङ्कटे गिरौ ।
भूतवेतालरक्षोभिर्ग्रहैश्चापि न बाध्यते ॥ ६॥
इदं कवचमज्ञात्वा यो जपेद् गणनायकम् ।
न च सिद्धिमाप्नोति मूढो वर्षशतैरपि ॥ ७॥
अघोरो मे यथा मन्त्रो मन्त्राणामुत्तमोत्तमः ।
तथेदं कवचं देवि दुर्लभं भुवि मानवैः ॥ ८॥
गोपनीयं प्रयत्नेन नाज्येयं यस्य कस्यचित् ।
तव प्रीत्या महेशानि कवचं कथ्यतेऽद्भुतम् ॥ ९॥
एकाक्षरस्य मन्त्रस्य गणकश्चर्षिरीरितः ।
त्रिष्टुप् छन्दस्तु विघ्नेशो देवता परिकीर्तिता ॥ १०॥
गँ बीजं शक्तिरोङ्कारः सर्वकामार्थसिद्धये ।
सर्वविघ्नविनाशाय विनियोगस्तु कीर्तितः ॥ ११॥
*ध्यानम्*
रक्ताम्भोजस्वरूपं लसदरुणसरोजाधिरूढं त्रिनेत्रं
पाशं चैवाङ्कुशं वा वरदमभयदं बाहुभिर्धारयन्तम् ।
शक्त्या युक्तं गजास्यं पृथुतरजठरं नागयज्ञोपवीतं
देवं चन्द्रार्धचूडं सकलभयहरं विघ्नराजं नमामि ॥ १२॥
*कवचम्*
गणेशो मे शिरः पातु भालं पातु गजाननः ।
नेत्रे गणपतिः पातु गजकर्णः श्रुती मम ॥ १३॥
कपोलौ गणनाथस्तु घ्राणं गन्धर्वपूजितः ।
मुखं मे सुमुखः पातु चिबुकं गिरिजासुतः ॥ १४॥
जिह्वां पातु गणक्रीडो दन्तान् रक्षतु दुर्मुखः ।
वाचं विनायकः पातु कष्टं पातु महोत्कटः ॥ १५॥
स्कन्धौ पातु गजस्कन्धो बाहू मे विघ्ननाशनः ।
हस्तौ रक्षतु हेरम्बो वक्षः पातु महाबलः ॥ १६॥
हृदयं मे गणपतिरुदरं मे महोदरः ।
नाभि गम्भीरहृदयः पृष्ठं पातु सुरप्रियः ॥ १७॥
कटिं मे विकटः पातु गुह्यं मे गुहपूजितः ।
ऊरु मे पातु कौमारं जानुनी च गणाधिपः ॥ १८॥
जङ्घे गजप्रदः पातु गुल्फौ मे धूर्जटिप्रियः ।
चरणौ दुर्जयः पातुर्साङ्गं गणनायकः ॥ १९॥
आमोदो मेऽग्रतः पातु प्रमोदः पातु पृष्ठतः ।
दक्षिणे पातु सिद्धिशो वामे विघ्नधरार्चितः ॥ २०॥
प्राच्यां रक्षतु मां नित्यं चिन्तामणिविनायकः ।
आग्नेयां वक्रतुण्डो मे दक्षिणस्यामुमासुतः ॥ २१॥
नैऋत्यां सर्वविघ्नेशः पातु नित्यं गणेश्वरः ।
प्रतीच्यां सिद्धिदः पातु वायव्यां गजकर्णकः ॥ २२॥
कौबेर्यां सर्वसिद्धिशः ईशान्यामीशनन्दनः ।
ऊर्ध्वं विनायकः पातु अधो मूषकवाहनः ॥ २३॥
दिवा गोक्षीरधवलः पातु नित्यं गजाननः ।
रात्रौ पातु गणक्रीडः सन्ध्योः सुरवन्दितः ॥ २४॥
पाशाङ्कुशाभयकरः सर्वतः पातु मां सदा ।
ग्रहभूतपिशाचेभ्यः पातु नित्यं गजाननः ॥ २५॥
सत्वं रजस्तमो वाचं बुद्धिं ज्ञानं स्मृतिं दयाम् ।
धर्मचतुर्विधं लक्ष्मीं लज्जां कीर्तिं कुलं वपुः ॥ २६॥
धनं धान्यं गृहं दारान् पौत्रान् सखींस्तथा ।
एकदन्तोऽवतु श्रीमान् सर्वतः शङ्करात्मजः ॥ २७॥
सिद्धिदं कीर्तिदं देवि प्रपठेन्नियतः शुचिः ।
एककालं द्विकालं वापि भक्तिमान् ॥ २८॥
न तस्य दुर्लभं किञ्चित् त्रिषु लोकेषु विद्यते ।
सर्वपापविनिर्मुक्तो जायते भुवि मानवः ॥ २९॥
यं यं कामयते नित्यं सुदुर्लभमनोरथम् ।
तं तं प्राप्नोति सकलं षण्मासान्नात्र संशयः ॥ ३०॥
मोहनस्तम्भनाकर्षमारणोच्चाटनं वशम् ।
स्मरणादेव जायन्ते नात्र कार्या विचारणा ॥ ३१॥
सर्वविघ्नहरं देवं ग्रहपीडानिवारणम् ।
सर्वशत्रुक्षयकरं सर्वापत्तिनिवारणम् ॥ ३२॥
धृत्वेदं कवचं देवि यो जपेन्मन्त्रमुत्तमम् ।
न वाच्यते स विघ्नौघैः कदाचिदपि कुत्रचित् ॥ ३३॥
भूर्जे लिखित्वा विधिवद्धारयेद्यो नरः शुचिः ।
एकबाहो शिरः कण्ठे पूजयित्वा गणाधिपम् ॥ ३४॥
एकाक्षरस्य मन्त्रस्य कवचं देवि दुर्लभम् ।
यो धारयेन्महेशानि न विघ्नैरभिभूयते ॥ ३५॥
गणेशहृदयं नाम कवचं सर्वसिद्धिदम् ।
पठेद्वा पाठयेद्वापि तस्य सिद्धिः करे स्थिता ॥ ३६॥
न प्रकाश्यं महेशानि कवचं यत्र कुत्रचित् ।
दातव्यं भक्तियुक्ताय गुरुदेवपराय च ॥ ३७॥


 ॥ इति श्रीरुद्रयामले एकाक्षरगणपतिकवचं सम्पूर्णम् ॥